करोड़ों की लागत से बनी एशिया महादेश की सबसे बड़ी दूसरी क्रेशर प्लांट की नीलामी कर हटाने की तैयारी

गढ़वा:  सेल प्रबंधन की ढुलमुल रवैया एवं राजनीतिक उपेक्षा के कारण भवनाथपुर स्थित एशिया महादेश के सबसे बड़े दूसरे क्रेशर प्लांट को काटकर हटाने की तैयारी ने भवनाथपुर औद्योगिक नगरी के मूल ढांचे को ही जड़ से समाप्त करने की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। हो सकता है कि भविष्य में पलामू प्रमंडल के लोग इस क्रेशर प्लांट को केवल फोटो में ही देख पाएंगे, हालांकि झारखंड राज्य के पलामू प्रमंडल के गढ़वा जिले का इकलौता सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम सेल बोकारो स्टील भवनाथपुर का दो खदान तो पहले ही बंद हो चुका है।

करोड़ों की लागत वाली एशिया के सबसे बड़े दूसरे क्रेशर प्लांट को गुपचुप तरीके से नीलामी हो चुकी है, बस इसे काट कर हटाने की तैयारी चल रही है, हालांकि इसका विरोध भी फिलहाल चल रहा है। राजनीतिक दबाव कितना कारगर होता है यह तो भविष्य तय करेगा।

क्रेशर प्लांट एवं भवनाथपुर औद्योगिक नगरी का इतिहास

इस्पात प्राधिकरण सेल ने अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए गढ़वा जिले के भवनाथपुर चुना पत्थर के भंडार को देखते हुए वर्ष 1965 में मांइस खोलने का निर्णय लिया। इस बीच आवश्यक संसाधन जुटाने के बाद वर्ष 1972 में एशिया का सबसे बड़ा क्रशर प्लांट खोला गया। माइंस स्थापना होने के बाद 1200 सेल कर्मियों की पदस्थापना की गई गयी।

इन कर्मियों ने दिन-रात मेहनत कर इस माइंस को बुलंदी तक पहुंचाया। इसी बीच 1990 में सेल ने सभी कैपिटव माइंस अलग करने का निर्णय लिया गया। सहमति मिलने के बाद रॉ मैटेरियल डिविजन (आरएमडी) बनाया गया था। 12 माइंस को शामिल कर इसका मुख्यालय कोलकाता बनाया गया था। रॉ मटेरियल डिविजन बनने के बाद माइंस पर प्रतिकूल असर दिखने लगा। इस माइंस में 1200 कर्मी थे। जुलाई 2021 को रॉ मटेरियल डिवीजन (आरएमडी ) को बोकारो स्टील सेल में मर्ज किया गया।

दोनों माइंस बंद होने से हजारों लोगों बेरोजगार हुए लोग

झारखंड राज्य स्थापना के बाद लोगों को आज जगी थी कि दोनों माइंस बंदी की काली छाया से निकल जाएगी, लेकिन आशा धूमिल हो गई। गढ़वा जिला में कई मंत्रियों के बनने के बावजूद इसकी तस्वीर में अंतर नहीं आया। बाजार विरान होने से इस पर निर्भर किराना दुकान, सब्जी विक्रेता लकड़ी विक्रेता सहित कई लोग बेरोजगार हो गए। वही घाघरा माइंस व तुलसीदास माइंस के मजदूर बेरोजगारी के मार सबसे ज्यादा झेल रहे हैं।

 उपेक्षा की मार: आरएमडी सेल ने घाघरा चूना पत्थर खदान को बंद किया था

झारखंड सरकार की उपेक्षा और सेल आरएमडी प्रबंधन के षड्यंत्र के कारण गढ़वा जिला स्थित भवनाथपुर में घाघरा चुना पत्थर को 6 मई 2014 को पटना में उपप्रमुख लेबर कमिश्नर (केंद्रीय) एके सेन की अदालत में सेल आरएमडी के डीजीएम( कार्मिक) टीके ढाल्ली, भवनाथपुर डीजीएम आरके झा, एटक यूनियन गणेश सिंह, पलामू प्रमंडल खान मजदूर संघ के अध्यक्ष सतपाल वर्मा, इंटक यूनियन के प्रतिनिधि एनके पांडे ने हस्ताक्षरकर खदान को बंद करने की साक्षी बने। इस माइंस के बंद होने से हजारों लोग बेरोजगार हो गए। लोगों के लिए जीविकोपार्जन भी चुनौती बन गया।

2020-21में तुलसीदामर डोलामाइट खदान बंद किया गया

तुलसीदामर डोलोमाइट खदान बंद करने के पीछे सरकार द्वारा लीज नवीकरण कराने, वन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं देने और सरकार से प्रदूषण प्रमाण पत्र निर्गत नहीं होने के कारण सेल के द्वारा 16 फरवरी 2020 को बंद कर दिया गया।

2100 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था

सेल ने घागरा चूना पत्थर व तुलसीदास मर डोलोमाइट खदान के संचालन के लिए भू-मालिकों से डिस्प्लेस एवं मुआवजे की बदौलत 2100 सौ एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया। साथ ही पत्थर की ढूलाई के लिए भवनाथपुर से मेराल तक 38 किलोमीटर रेलवे लाइन भी बिछाई गयी।

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