अलविदा आचार्य: IPS रहते हुए भी और रिटायरमेंट के बाद भी राम मंदिर निर्माण में दिया था अहम योगदान

मंजेश कुमार

पटना: रविवार को राजधानी पटना में स्थित प्रसिद्ध महावीर मंदिर के संस्थापक पूर्व IPS आचार्य कुणाल किशोर के निधन की खबर आते ही बिहार समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत केंद्रीय मंत्री, कई राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री समेत आमजनों ने शोक व्यक्त किया।

आचार्य किशोर कुणाल न सिर्फ पटना के महावीर मंदिर के संस्थापक या बिहार राज्य न्यास बोर्ड के सचिव या अयोध्या श्रीराम मंदिर समिति के सदस्य थे बल्कि वे गरीब गुरबों और जरुरतमंदों की एक आवाज थे। उनके द्वारा स्थापित किये गए ट्रस्ट के माध्यम से प्रतिदिन हजारों जरूरतमंद लोग लाभान्वित होते हैं। आचार्य कुणाल किशोर गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी भी रह चुके हैं और इस दौरान वे पटना के एसएसपी भी रहे। भगवान राम में आस्था और समाजसेवा की चाहत के कारण उन्होंने आईपीएस की नौकरी से उस वक्त वीआरएस लिया जब उनका करियर परवान पर था।

मुजफ्फरपुर में हुआ था जन्म

पूर्व आईपीएस आचार्य कुणाल किशोर का जन्म मुजफ्फरपुर के बरुराज गांव में 1950 में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा भी उनके गांव में ही हुआ और फिर पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने इतिहास और संस्कृत की पढाई पूरी की। 1970 में उन्होंने स्नातक की डिग्री ली और 1972 में उनका चयन गुजरात कैडर में यूपीएससी में हो गया। वे सबसे पहले गुजरात के आनंद के एसपी के पद पर पदस्थापित किये गए और 1978 में वे अहमदबाद के पुलिस उपायुक्त भी बन गए। 1983 में उन्हें पटना का एसएसपी बनाया गया था।

पुलिस सेवा में रहते हुए भी वे समाजसेवा के प्रति समर्पित रहे और उनकी हर तरफ चर्चा होती थी। समाजसेवा भगवतभक्ति की वजह से उन्होंने 2001 में वीआरएस ले लिया और फिर वे बिहार राज्य न्यास बोर्ड के अध्यक्ष बने। इस बीच उन्होंने कई मंदिर, अस्पताल और स्कूल की स्थापना की।

राम मंदिर निर्माण में योगदान

पूर्व आईपीएस आचार्य कुणाल किशोर का श्रीराम मंदिर निर्माण में भी अहम योगदान रहा। जब वे आईपीएस थे उस वक्त भी उन्हें विश्व हिंदू परिषद और बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी के बीच मध्यस्थता के लिए विशेष कर्तव्य पदाधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें यह जिम्मेदारी तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने दी थी। इसके साथ ही आचार्य किशोर कुणाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण में भी अहम भूमिका निभाई और उन्होंने महावीर मंदिर ट्रस्ट की तरफ से कई तरह का योगदान दिया।

सबसे बड़े मंदिर का निर्माण

आचार्य किशोर कुणाल ने विश्व के सबसे बड़े मंदिर रामायण मंदिर का बीड़ा उठाया और इस मंदिर का निर्माण पूर्वी चंपारण में किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने राजधानी पटना में ज्ञान निकेतन नामक विद्यालय, महावीर आरोग्य संस्थान, महावीर कैंसर संस्थान, महावीर नेत्रालय के साथ ही देश का सबसे पहला बच्चों के लिए कैंसर अस्पताल की नींव भी रखी। उनके ये सभी अस्पताल लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है।

कल होगा अंतिम संस्कार

आचार्य कुणाल किशोर के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए महावीर स्थान से लेकर महावीर कैंसर संस्थान और उनके अन्य संस्थानों में ले जाया जायेगा। उनका अंतिम संस्कार हाजीपुर के कोनहारा गंगा घाट पर कल किया जायेगा। उनके निधन की खबर सुनते ही बिहार सरकार के मंत्री और आचार्य किशोर कुणाल के समधी अशोक चौधरी, सुमित सिंह, डीजीपी विनय कुमार, डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह, डीआईजी राजीव मिश्रा समेत बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचने लगे।

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