Bihar Teacher Biometric Attendance: राज्य में शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग ने नया निर्देश जारी किया है। अनुदानित इंटरमीडिएट और संबद्ध डिग्री कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए अब बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य किया गया है। विभाग की ओर से कॉलेजों के प्राचार्यों को शिक्षकों और कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति से संबंधित रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य शिक्षण संस्थानों में उपस्थिति से जुड़ी प्रक्रिया को निर्धारित व्यवस्था के तहत संचालित करना है।
नियम नहीं मानने पर अनुशासनिक कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बायोमेट्रिक उपस्थिति से जुड़े निर्देशों का पालन नहीं करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में संबंधित अनुदान राशि रोके जाने का प्रावधान भी बताया गया है। कॉलेजों के प्राचार्यों की जिम्मेदारी होगी कि शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की उपस्थिति से संबंधित रिपोर्ट विभाग को उपलब्ध कराई जाए। रिपोर्ट के आधार पर विभाग आगे की प्रक्रिया तय करेगा। इससे कॉलेजों में शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड बायोमेट्रिक व्यवस्था के माध्यम से रखने पर जोर दिया गया है।
स्कूलों में भी अनुदान से जुड़ी उपस्थिति व्यवस्था
बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था केवल कॉलेजों तक सीमित नहीं रखी गई है। परीक्षाफल के आधार पर अनुदान प्राप्त करने वाले माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में भी शिक्षकों एवं कर्मचारियों के बीच अनुदान राशि के वितरण को बायोमेट्रिक अटेंडेंस से जोड़ने का प्रावधान किया गया है। इस व्यवस्था के तहत शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए अनुदान राशि के वितरण की प्रक्रिया तय की जाएगी। विभाग ने संस्थानों को निर्धारित व्यवस्था और फॉर्मूले के अनुसार ही राशि बांटने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि संबंधित संस्थानों में उपस्थिति रिकॉर्ड का अनुदान वितरण की प्रक्रिया में भी इस्तेमाल किया जाएगा।
चार श्रेणियों में बांटे गए शिक्षक-कर्मचारी
शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और कर्मचारियों के पदों को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी में प्रिंसिपल और हेडमास्टर को रखा गया है। दूसरी श्रेणी में शिक्षक और लेक्चरर शामिल हैं। तीसरी श्रेणी में प्रयोगशाला तकनीशियन, कंप्यूटर सहायक, लाइब्रेरियन और ऑफिस असिस्टेंट को शामिल किया गया है। वहीं, चौथी श्रेणी में केयरटेकर, ऑफिस अटेंडेंट और गार्ड को रखा गया है। विभाग के निर्देश के अनुसार इन्हीं श्रेणियों और निर्धारित व्यवस्था के आधार पर अनुदान राशि के वितरण की प्रक्रिया अपनाई जानी है।
रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने कॉलेज प्राचार्यों से बायोमेट्रिक उपस्थिति की रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उपस्थिति नियमों के पालन की स्थिति स्पष्ट होगी और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि निर्धारित अटेंडेंस व्यवस्था का पालन नहीं करने वालों पर अनुशासनिक कार्रवाई हो सकती है। वहीं, अनुदान राशि के वितरण में भी तय नियमों और फॉर्मूले का पालन करना होगा। इस नई व्यवस्था से कॉलेजों और संबंधित स्कूलों में शिक्षकों तथा कर्मचारियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड अनुदान वितरण की प्रक्रिया से सीधे जुड़ गया है।
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