जनार्दन सिंह की रिपोर्ट
डिजिटल डेस्क : ‘महाराज जी‘ ने ‘बहन जी‘ को किया बर्थ-डे विश तो निकाले जाने लगे सियासी मायने। महाकुंभ 2025 के आगाज को लेकर निरंतर व्यस्त चल रहे ‘महाराज जी’ यानी यूपी के CM Yogi आदित्यनाथ मंगलवार शाम तक गोरखपुर में खुद ही प्रवास करते हुए गोरखपुर के प्रमुख पर्व खिचड़ी मेला में सक्रिय भागीदारी की। बुधवार की सुबह फिर महाकुंभ 2025 के बारे में व्यवस्थापना-तंत्र से मुकम्मल फीडबैक लेकर रूटीन के सियासी राजकाज में जुटे।
इसी क्रम में सबसे पहले CM Yogi सियासी शिष्टाचार निभाने में जुटे और ‘बहन जी’ के रूप में अपनी अलग रसूख रखने वालीं बसपा सुप्रीमो एवं यूपी की पुर्व सीएम मायावती को फोन मिलाया। ‘बहन जी’ की ओर कॉल रिसीव होते ही ‘महाराज जी’ की ओर उन्हें जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं यानी आम बोलचाल की भाषा में हैप्पी बर्थ-डे विश किया।
‘बहन जी’ को ‘महाराज जी’ के बर्थ-डे विश के गूढ़ हैं सियासी मायने…
‘बहन जी’ यानी बसपा सुप्रीमो एवं यूपी की पुर्व सीएम मायावती को ‘महाराज जी’ यानी यूपी के CM Yogi आदित्यनाथ के बुधवार की सुबह-सुबह बर्थ-डे विश करने काफी गूढ़ सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। उन मायनों पर बात में जिक्र करते हैं। पहले ‘महाराज जी’ यानी यूपी के CM Yogi आदित्यनाथ की ओर से ‘बहन जी’ यानी बसपा सुप्रीमो एवं यूपी की पुर्व सीएम मायावती को दिए गए संदेश के बारे में भी जानें।
‘महाराज जी’ यानी यूपी के CM Yogi आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर इस संदेश को पोस्ट भी किया है। इसमें लिखा है – ‘उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सु्श्री मायावती जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई ! …प्रभु श्रीराम से आपके लिए दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना है’।

‘महाराज जी’ की ओर से ‘बहन जी’ के लिए इस बधाई संदेश में गूढ़ सियासी मायने इसलिए भी निकाले जा रहे हैं क्योंकि यूपी के अयोध्या में मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले चुनाव में भाजपा के साथ ही CM Yogi आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। वहां बीते मंगलवार को ही मकर संक्रांति पर भाजपा की ओर से पुराने दावेदार बाबा गोरखनाथ का पत्ता काटकर पासी समाज के पेशे से वकील चंद्रभान पासवान को प्रत्याशी घोषित किया गया है।
उनके सामने पहले ही चुनावी ताल ठोंक रहे सपा सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद हैं। खास बात यह कि बसपा मिल्कीपुर चुनाव में नहीं उतर रही और उसके चलते माना जा रहा है कि दलित वोटों में बंटवारा न होने का सियासी लाभ सत्तारूढ़ दल को मिल सकता है। बीते लोकसभा में फैजाबा-अयोध्या लोकसभा सीट गंवाने के चलते भाजपा की खूब सियासी किरकिरी हुई और भाजपा में ही CM Yogi आदित्यनाथ के खिलाफ सुर उठने लगे थे।
हालांकि बाद में विरोध में उठते सियासी समीकरणों के सापेक्ष शांत होकर ओट में चले गए लेकिन माना जा रहा है कि भाजपा और विशेषकर खुद CM Yogi आदित्यनाथ होने वाले चुनावों में अपनी ओर से कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाह रहे। बुधवार की सुबह ‘बहन जी’ को संपर्क कर बर्थ-डे विश के साथ ही उनके लिए ‘महाराज जी’ की ओर से प्रभु श्रीराम से की गई कामना काफी कुछ बयां कर देती है।

मिल्कीपुर के सियासत में अहम दलित वोटरों को साधने में तल्लीनता से जुटी भाजपा…
बता दें कि मिल्कीपुर सीट पर दलित मतादाता ही निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। उसमें भी पासी समाज की संख्या सबसे अधिक है। यही वजह है कि पिछले कई चुनावों से सपा ने पासी समाज के ही पुराने और वरिष्ठ अवधेश प्रसाद पर दांव लगाकर सफल होती रही है। चुनावी इतिहास के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1991 से अब तक के सभी चुनावों में इसी सीट पर भाजपा को सिर्फ दो ही बार जीत मिली है।
यानि सियासी तौर पर इस सीट को सपा ही गढ़ माना जाता है। भाजपा नेतृत्व इस बार रणनीति बदलते हुए एक ऐसे प्रत्याशी की तलाश में जुटा था, जिसकी छवि निर्विवाद हो और बुजुर्ग सपा नेता अवधेश प्रसाद के मुकाबले दलित समाज के युवा वर्ग में अच्छा प्रभाव छोड़ सके। उसी कड़ी में पुराने नेताओं के बजाए भाजपा ने एक युवा को मैदान में उतारकर दलित समाज के युवा वर्ग को साधने की भी कोशिश की है।
चूंकि लोकसभा चुनाव से ही भाजपा सपा सांसद अवधेश प्रसाद की उम्र को लेकर सियासी तीर चलाती रही है। इसलिए भाजपा ने अपने उम्रदराज नेताओं की दावेदारी को किनारे करके चंद्रभानु को तरजीह दी है। कहा जा रहा है कि चंद्रभानु का युवा वर्ग पर अच्छा प्रभाव है और लगातार वह दो साल से युवाओं के बीच काम भी कर रहे हैं। इसलिए उपचुनाव में दलित युवाओं को साधने में मदद मिलेगी।

मिल्कीपुर में अबकी सपा को पूरी तरह घेरने में जुटी भाजपा, समझिए रणनीति…
मिल्कीपुर में भाजपा ने पासी समाज के चंद्रभानु पासवान को मैदान में उतारकर सपा को घेरने की कोशिश की है। जातीय समीकरण साधने के साथ ही भाजपा ने चंद्रभान के जरिए सपा सांसद अवधेश प्रसाद के उस नारे का जवाब देने की कोशिश की है, जो सपा उम्मीदवार के तौर पर अवधेश प्रसाद ने अयोध्या सीट पर लोकसभा चुनाव के दौरान दिया था।
उन्होंने प्रचार के दौरान ‘अयोध्या न काशी, अबकी बार चलेगा पासी ‘ का नारा दिया था। माना जा रहा है कि भाजपा ने अवधेश के इसी नारे के जवाब में अबकी बार पासी की काट के लिए पासी पर ही दांव लगाकर सपा को घेरने की कोशिश की है। दरअसल लोकसभा चुनाव में अयोध्या सीट हारने के बाद से ही भाजपा सपा सांसद चुने गए अवेधश प्रसाद की सीट पर कब्जा करने के लिए पासी समाज के ही एक ऐसे चेहरे की तलाश में थी, जो मजबूत टक्कर दे सके।

इसके लिए पार्टी की ओर से कराए गए सर्वे में चंद्रभानु का नाम मजबूती सामने आया था। इसलिए भाजपा ने विपक्ष के पासी उम्मीदवार के सामने पासी समाज के चंद्रभानु को टिकट देने का फैसला किया है।
माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव परिणाम को देखते हुए भाजपा भी यह समझ चुकी थी कि इस बार उपचुनाव में अयोध्या, काशी व मथुरा जैसे धार्मिक एजेंडा के बजाए सपा के नारे को ही हथियार बनाकर मुकाबला में उतरना फायदेमंद होगा। इसलिए लिहाज से ही भाजपा ने भी पासी की काट के लिए पासी समाज से ही उम्मीदवार देने का फैसला लिया है।

मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी बने चंद्रभान पासवान को जानें…
चंद्रभान पासवान राजनीति के ककहरा सीखने वाले नौसिखियों में से नहीं हैं। वह फैजाबाद और अयोध्या की जमीनी सियासत में भाजपाई धुरंधर भी माने जाते हैं। बताया जा रहा है कि युवा चेहरा होने की वजह से भाजपा ने चंद्रभान को मौका दिया है। चंद्रभानु पासी समाज से आते हैं। भाजपा प्रत्याशी चंद्रभान पासवान पेशे से वकील हैं।वह भाजपा की जिला इकाई में कार्य समिति के भी सदस्य हैं।
चंद्रभान पासवान की पत्नी रुदौली से दो बार से जिला पंचायत सदस्य हैं। उनके पिता बाबा राम लखन दास ग्राम प्रधान है। चंद्रभानु मुख्य तौर पर व्यवसायी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। रुदौली से लेकर सूरत तक साड़ी व्यापार का कारोबार भी है। वह पिछले कुछ समय से मिल्कीपुर विधानसभा में लगातार सक्रिय रहे हैं। मिल्कीपुर में 17 जनवरी से नामांकन शुरू होगा। यहां 5 फरवरी को वोटिंग और 8 फरवरी को नतीजा आएगा।

मिल्कीपुर सीट भाजपा और समाजवादी पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का विषय बनी हुई है। भाजपा Ayodhya में हुए नुकसान की भरपाई करने की चुनौती का सामना कर रही है और उसने योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में शीर्ष नेताओं को प्रचार में उतारने की तैयारी की है। मंत्री सूर्य प्रताप साही की अगुवाई में 6 मंत्रियों को लगाया है। इनमें जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, सहकारिता राज्यमंत्री जेपीएस राठौड़, आयुष मंत्री दयाशंकर सिंह, राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह और सतीश शर्मा शामिल हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक भी प्रचार अभियान में सक्रिय रूप से हिस्सा लेंगे।
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