पटना : कदाचार और अनुशासनहीनता के आरोप में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 13 अभ्यर्थियों पर कार्रवाई की है। इनमें से 12 उम्मीदवारों को तीन वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया गया है, जबकि एक को आजीवन के लिए आयोग की परीक्षाओं से प्रतिबंधित किया गया है। इसके पीछे आयोग ने तर्क दिया है कि यह कार्रवाई परीक्षा प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए की गई है।
क्यों किया परीक्षा से प्रतिबंधित?
बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक ने आधिकारिक वेबसाइट पर सूचना जारी करते हुए बताया है कि ये निर्णय सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और गहन जांच के बाद लिए गए हैं। जिसमें पटना के बापू परीक्षा केंद्र और समस्तीपुर के एक केंद्र से जुड़े मामले प्रमुख थे। समस्तीपुर में एक उम्मीदवार दूसरे व्यक्ति के बदले परीक्षा देते हुए पकड़ा गया था। इस ‘इम्पर्सनेशन’ के चलते आयोग ने उसे आजीवन के लिए प्रतिबंधित कर दिया है।
इस वजह से 11 छात्रों को मिली सजा
वहीं, 11 अन्य उम्मीदवारों ने बापू परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिकाएं गैरकानूनी तरीके से बाहर ले जाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दीं। जिससे परीक्षा की गोपनीयता भंग हुई और आयोग की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। इन सभी को तीन वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया गया है।
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Social Media पर पोस्ट करना पड़ा महंगा
इसके अलावा एक उम्मीदवार को सोशल मीडिया पर आयोग के खिलाफ भ्रामक और अपमानजनक पोस्ट साझा करने के चलते उसे भी तीन साल के लिए आयोग की परीक्षाओं से वंचित किया गया है। अब इन 12 छात्रों को आयोग की परीक्षा में बैठने के लिए तीन साल के लिए इंतजार पड़ेगा। अब देखना होगा कि तब तक इनकी उम्र कितनी बची रहेगी।
प्रीलिम्स एग्जाम को लेकर प्रदर्शन जारी
बहरहाल, 70वीं प्रीलिम्स परीक्षा को रद्द कराने को लेकर पटना के गर्दनीबाग में दो महीने से अधिक समय से अभ्यार्थी प्रदर्शन कर रहे हैं। अभ्यर्थियों के एक समूह की ओर से पटना हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई है। इस संबंध में सुनवाई जारी है। इसी बीच आयोग ने मेंस परीक्षा की तिथि की भी घोषणा कर दी है। 25-30 अप्रैल के बीच परीक्षा होगी।
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स्नेहा राय की रिपोर्ट
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