रांची: झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के बिजली टैरिफ को लेकर मंगलवार को झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) में अंतिम जनसुनवाई आयोजित की गई। रांची के बरियातू स्थित आईएमए भवन में हुई इस सुनवाई में उपभोक्ताओं ने टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया।
उपभोक्ताओं ने आयोग से आग्रह किया कि बढ़ी हुई बिजली दरों को मंजूरी न दी जाए, क्योंकि पहले से ही स्मार्ट मीटर की गड़बड़ियों और डिले पेमेंट सरचार्ज (DPS) जोड़कर बिल देने से उपभोक्ता परेशान हैं।
जेबीवीएनएल का तर्क:
जेबीवीएनएल ने आयोग को जानकारी दी कि बीते पांच वित्तीय वर्षों में उसे 13% की दर से डिस्ट्रीब्यूशन लॉस हो रहा है। निगम का तर्क है कि झारखंड में पड़ोसी राज्यों की तुलना में सबसे सस्ती बिजली दी जा रही है। उदाहरण के तौर पर:
छत्तीसगढ़ में शहरी उपभोक्ता को ₹8.10 प्रति यूनिट
बिहार में ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ता को ₹7.96 प्रति यूनिट और शहरी उपभोक्ता को ₹8.93 प्रति यूनिट
झारखंड में ग्रामीण उपभोक्ता को ₹6.30 प्रति यूनिट और शहरी उपभोक्ता को ₹6.65 प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जा रही है।
इसलिए, जेबीवीएनएल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए ₹8.45 प्रति यूनिट और शहरी उपभोक्ताओं के लिए ₹9.25 प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव रखा है।
जल्द हो सकती है टैरिफ की घोषणा
जनसुनवाई में नियामक आयोग के सदस्य टेक्निकल अतुल कुमार, सदस्य (लॉ) महेंद्र प्रसाद और सचिव राजेंद्र प्रसाद नायक ने उपभोक्ताओं की आपत्तियां सुनीं। 26 मार्च को राज्य विद्युत सलाहकार समिति की बैठक में टैरिफ पर अंतिम सहमति ली जाएगी। इसके बाद 31 मार्च तक नई दरों की घोषणा संभव है, जो 1 अप्रैल 2025 से लागू हो सकती है।
उपभोक्ताओं के विरोध के बीच अब नियामक आयोग का फैसला महत्वपूर्ण होगा।
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