Health News: बच्चेदानी में गांठ (फाइब्रॉइड) के ये 4 लक्षण बिल्कुल न करें नजरअंदाज, देर हो तो हटाना पड़ सकता है यूट्रस

Health News: महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं ऐसी होती हैं जो समय रहते न पहचानने पर गंभीर परिणाम दे सकती हैं। इन्हीं में से एक है बच्चेदानी में गांठ बनना, जिसे मेडिकल भाषा में यूटेराइन फाइब्रॉइड्स (Uterine Fibroids) कहा जाता है। यह समस्या 25 से 40 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जिन महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर अधिक होता है, उनमें इस समस्या का खतरा बढ़ जाता है।

क्या होती है यूटेराइन फाइब्रॉइड्स की समस्या?

फाइब्रॉइड्स एक प्रकार की गैर-कैंसरयुक्त (non-cancerous) गांठें होती हैं, जो बच्चेदानी (यूटरस) की मांसपेशियों की दीवारों पर विकसित होती हैं। यह गांठें एक या एक से अधिक संख्या में हो सकती हैं और आकार में छोटी मटर से लेकर बड़े फलों तक की हो सकती हैं। अधिकतर मामलों में ये फाइब्रॉइड्स गंभीर नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन कुछ स्थितियों में इनका प्रभाव महिला की प्रजनन क्षमता, मासिक धर्म चक्र और सामान्य जीवनशैली पर पड़ सकता है।

बच्चेदानी में गांठ के चार प्रमुख लक्षण जिन पर ध्यान देना जरूरी है:

  1. अत्यधिक मासिक रक्तस्राव (Heavy Periods)

यदि हर महीने मासिक धर्म के दौरान सामान्य से बहुत अधिक खून बहता है या पीरियड्स लंबे समय तक चलते हैं, तो यह फाइब्रॉइड का संकेत हो सकता है। ऐसे में शरीर में खून की कमी (एनीमिया) भी हो सकती है।

2. पेट के निचले हिस्से में दर्द या दबाव महसूस होना

फाइब्रॉइड्स बढ़ने लगती हैं तो यह गर्भाशय पर दबाव डालती हैं जिससे पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द, भारीपन या खिंचाव महसूस हो सकता है। यह दर्द पीठ और टांगों तक भी जा सकता है।

3. बार-बार पेशाब लगना या पेशाब में रुकावट

यदि फाइब्रॉइड्स मूत्राशय पर दबाव बनाती हैं, तो बार-बार पेशाब आने की शिकायत हो सकती है। वहीं, कुछ मामलों में पेशाब करने में कठिनाई या अधूरा महसूस होने की समस्या भी सामने आती है।

4. गर्भधारण में कठिनाई या गर्भपात का खतरा

कुछ मामलों में फाइब्रॉइड्स गर्भधारण को प्रभावित कर सकती हैं। यह गर्भाशय की आंतरिक संरचना को बाधित करती हैं जिससे गर्भधारण में दिक्कत और बार-बार गर्भपात जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

क्या है कारण?

अब तक बच्चेदानी में गांठ बनने का कोई स्पष्ट और एकमात्र कारण सामने नहीं आया है, लेकिन इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन, आनुवंशिक प्रवृत्ति, मोटापा, और कुछ लाइफस्टाइल फैक्टर्स जिम्मेदार हो सकते हैं।

Health News: समय पर पहचान क्यों है जरूरी?

यदि इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए और समय रहते इलाज न कराया जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। कई मामलों में ऑपरेशन कर यूट्रस निकालना (हिस्टरेक्टॉमी) पड़ सकता है, जिससे महिला की गर्भधारण की क्षमता समाप्त हो जाती है।

इसलिए यदि किसी महिला को लंबे समय तक ऊपर बताए गए लक्षण नजर आते हैं, तो उसे तुरंत किसी अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से संपर्क कर जांच करानी चाहिए। समय पर किया गया उपचार जैसे दवाइयां, हार्मोन थेरेपी या जरूरत पड़ने पर सर्जरी से इस समस्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

महिलाओं के लिए सलाह:

  1. अपनी मासिक चक्र पर नजर रखें
  2. पेट दर्द और पेशाब की आदतों को हल्के में न लें
  3. नियमित रूप से गाइनेकोलॉजिकल जांच कराएं
  4. संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से हार्मोन संतुलन बनाए रखें

निष्कर्ष: बच्चेदानी में गांठ एक आम समस्या है लेकिन यदि समय रहते इसका इलाज न हो तो यह गंभीर रूप ले सकती है। महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों को समझना और नजरअंदाज न करना बेहद जरूरी है, क्योंकि समय पर किया गया इलाज ही भविष्य की जटिलताओं से बचा सकता है।

 

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