रांची: बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच में तेजी लाते हुए एसीबी (Anti-Corruption Bureau) कोर्ट ने बुधवार को गुजरात और महाराष्ट्र के सात आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। ये सभी आरोपी दो अलग-अलग निजी प्लेसमेंट एजेंसियों से जुड़े हैं, जिन पर फर्जी बैंक गारंटी के जरिए मैनपावर सप्लाई का ठेका लेने और शराब आपूर्ति में अनियमितता बरतने के गंभीर आरोप हैं।
गुजरात स्थित विजन हॉस्पिटैलिटी सर्विस एंड कंसल्टेंट एजेंसी से जुड़े जिन चार लोगों के खिलाफ वारंट जारी हुआ है, वे हैं — बिपिन जादवभाई परमार, महेश शेडगे, परेश अभेसिंह ठाकोर और बिक्रमसिंह अभीसिंह ठाकोर। वहीं, महाराष्ट्र की मार्शन इनोवेटिव सिक्योरिटी सर्विसेज से संबंधित जगन तुकाराम देसाई, कमल जगन देसाई और शीतल जगन देसाई के खिलाफ भी वारंट जारी किया गया है।
इस घोटाले में अब तक 16 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से नौ के खिलाफ अब तक गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है।
दफ्तर से जब्त किए गए दस्तावेज
बुधवार को एक बार फिर एसीबी की टीम उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के कार्यालय पहुंची और वहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। सूत्रों के अनुसार, ये कागजात घोटाले से जुड़े लेनदेन और ठेका प्रक्रिया से जुड़े हो सकते हैं।
पूर्व उत्पाद सचिव मुकेश कुमार से आज होगी पूछताछ
इस मामले में एसीबी ने योजना एवं विकास विभाग के वर्तमान सचिव और पूर्व उत्पाद सचिव मुकेश कुमार को भी पूछताछ के लिए गुरुवार को एसीबी मुख्यालय बुलाया है। उन पर आरोप है कि उत्पाद सचिव के तौर पर रहते हुए उन्होंने विभाग में व्याप्त अनियमितताओं पर रोक नहीं लगाई। उनके कार्यकाल में शराब की एमआरपी से अधिक दर पर खुलेआम बिक्री होती रही। साथ ही, जिन प्लेसमेंट एजेंसियों ने फर्जी बैंक गारंटी दी, उन पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
एसीबी की नोटिस के बावजूद पूछताछ में नहीं पहुंचे निदेशक
विजन हॉस्पिटैलिटी के जिन चार निदेशकों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा गया था — बिपिन जादव भाई परमार, महेश शेडगे, परेश अभे सिंह ठाकोर और बिक्रम सिंह अभी सिंह ठाकोर — वे तय समय पर उपस्थित नहीं हुए। एसीबी जांच में यह पुष्टि हो चुकी है कि इन निदेशकों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ठेका हासिल किया था।







