आम्रपाली कोल परियोजना में नौकरी व मुआवजा घोटाला: 22 लोगों पर सीआईडी ने दर्ज की प्राथमिकी, कई सरकारी अफसर भी जांच के घेरे में

रांची:  आम्रपाली कोल परियोजना से जुड़े बहुचर्चित नौकरी और मुआवजा घोटाले में झारखंड की आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 22 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह प्राथमिकी 23 जून को दर्ज की गई है। इन आरोपियों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी और मुआवजा लेने का आरोप है। इसके अलावा सीआईडी अब इस मामले में सीसीएल और टंडवा अंचल कार्यालय के संबंधित पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

डीजीपी के निर्देश पर प्रारंभिक जांच, आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए

झारखंड पुलिस के डीजीपी अनुराग गुप्ता के निर्देश पर सीआईडी ने इस मामले की प्रारंभिक जांच की थी। जांच के दौरान कई गड़बड़ियां सामने आईं और आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद विस्तृत जांच की अनुमति ली गई और अब सीआईडी ने इसे टेकओवर कर जांच शुरू कर दी है।

पहली प्राथमिकी भू-अर्जन पदाधिकारी ने कराई थी दर्ज

इस पूरे घोटाले में पहली प्राथमिकी चतरा जिले के भू-अर्जन पदाधिकारी वैभव सिंह ने दर्ज कराई थी। यह मामला उस समय उजागर हुआ जब टंडवा अंचल से जारी भूमि सत्यापन प्रमाण पत्रों और सीसीएल की ओर से प्राप्त वंशावली, लगान रसीद व अन्य दस्तावेजों की सघन जांच की गई।

रैयत की शिकायत पर दर्ज हुई मुख्य प्राथमिकी

रैयत परमेश्वर गंझू की शिकायत पर टंडवा थाना में 29 मार्च को एक अन्य प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जिसमें सीआईडी ने 22 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इन पर फर्जी कागजात के आधार पर मुआवजा और नौकरी प्राप्त करने का आरोप है।

  1. नामजद आरोपियों की सूची

    सूरन भुईया, सीमा भुईयां, सरिता देवी, बुधन भुईया, गोपी भुईया, किशन भुईया, पूनम कुमारी, मनोहर राम, करण भुईया, अमित कुमार, विजय भुईया, बिरन कुमार भुईया, कुलेश्वर कुमार, इस्माइल अंसारी, मो. इब्राहिम, मो. रिजवान, अनवर अंसारी, आफताब अंसारी, सगुफ्ता अंजुम, नुमान अंसारी, मोहसिन कमल, खुर्शीद अंसल

    कैसे हुआ फर्जीवाड़ा: जांच में सामने आई साजिश की परतें

इस पूरे मामले की जांच के लिए सिमरिया एसडीओ की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई थी। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि टंडवा अंचल कार्यालय के कुछ कर्मियों ने सीसीएल के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी वंशावली, फर्जी लगान रसीद, हुकुमनामा और जमाबंदी तैयार कराई। इसके आधार पर ऐसे लोगों को नौकरी और मुआवजा दिया गया, जिनकी जमीन परियोजना में अधिग्रहित नहीं हुई थी।

अब अफसरों पर भी गिरेगी गाज

सीआईडी की जांच अब सिर्फ नामजद 22 आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें सीसीएल पिपरवार क्षेत्र और टंडवा अंचल कार्यालय के उन अफसरों और कर्मचारियों की भी जांच होगी, जिनकी भूमिका दस्तावेजों के सत्यापन और प्रमाण पत्र जारी करने में रही है। सीआईडी का कहना है कि इस संगठित घोटाले में शामिल सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों और लाभार्थियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

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