JTET परीक्षा पर सरकार चुप क्यों? अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा, 15 जुलाई को होगा सांकेतिक धरना

Ranchi: झारखंड में शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा है। 2016 के बाद अब तक न तो परीक्षा आयोजित की गई और न ही सरकार की ओर से कोई ठोस पहल दिखाई दी। ऐसे में अभ्यर्थियों ने 15 जुलाई को राजभवन के समक्ष सांकेतिक धरना प्रदर्शन का ऐलान किया है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर परीक्षा जल्द आयोजित नहीं की गई, तो विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा।

JTET अभ्यर्थी चंदन ने बताया कि 2016 के बाद से अब तक अभ्यर्थी परीक्षा की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन शिक्षा विभाग और सरकार की उदासीनता ने लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार न तो नौकरी दे रही है, और न ही परीक्षा आयोजित कर रही है, जिससे युवाओं का उम्र सीमा भी खत्म हो रहा है।

38 करोड़ रुपये कमाए, फिर भी परीक्षा रद्द!
2024 में सरकार ने एक बार फिर JTET के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। करीब 3.5 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन कर परीक्षा की तैयारी शुरू की, जिससे सरकार को लगभग ₹38 करोड़ का राजस्व मिला। लेकिन बाद में सिलेबस विवाद और नियमावली में भ्रम की वजह से परीक्षा स्थगित कर दी गई। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सिलेबस इस कदर जटिल था, मानो किसी वैज्ञानिक की भर्ती की जा रही हो।

NCTE के नियमों की हो रही अनदेखी
अभ्यर्थियों ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के नियम के अनुसार, हर राज्य को हर वर्ष TET परीक्षा का आयोजन करना अनिवार्य है। लेकिन झारखंड में शिक्षा विभाग ने इस नियम की लगातार अनदेखी की है। कई बार नियमावली बदलने के बाद भी परीक्षा नहीं कराई गई।

भाषाई भेदभाव और गलत नियमावली से छात्र परेशान
चंदन ने बताया कि कुछ जिलों में उन भाषाओं को परीक्षा में शामिल किया गया है, जो वहां बोली ही नहीं जातीं। इससे छात्रों को अतिरिक्त मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही प्रशिक्षु (Appearing) छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जा रही, जो कि NCTE के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

24000 पदों की बहाली पर भी संकट
राज्य सरकार ने शिक्षकों की 24000 पदों पर नियुक्ति की घोषणा की थी, लेकिन JTET परीक्षा न होने के कारण योग्य अभ्यर्थी उसमें शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इससे न सिर्फ छात्र हताश हैं, बल्कि झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी बनी हुई है।

JTET अभ्यर्थियों की सरकार से मांग:
  • JTET परीक्षा का तुरंत आयोजन किया जाए
  • NCTE नियमों के अनुसार Appearing छात्रों को भी शामिल किया जाए
  • 24000 शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया को तेज किया जाए
  • शिक्षा विभाग पारदर्शिता के साथ नियमावली बनाए
  • उम्र सीमा पार कर चुके अभ्यर्थियों के लिए विशेष अवसर सुनिश्चित किया जाए

अब देखना यह है कि सरकार इन अभ्यर्थियों की मांगों पर कब तक संज्ञान लेती है और क्या वाकई JTET की परीक्षा का आयोजन कर झारखंड के लाखों युवाओं को भविष्य संवारने का अवसर देगी या फिर यह आंदोलन लंबा खिंचेगा।

 

 

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