पुणे से पटना के लिए रवाना हुआ मेट्रो कोच, पहुंचेगा 18 तक

पटना : पटना मेट्रो के प्रथामिक कॉरेडोर में 15 अगस्त से परिचालन शुरू होगा। इसमें तीन कोच वाली मेट्रो चलाई जाएगी। कोच का निर्माण पुणे में करने के बाद इसे पटना के लिए रवाना कर दिया गया है। 18 जुलाई तक डिपो में पहुंचने की उम्मीद है। एक कोच को बड़े ट्रक पर लोड करके लाया जा रहा है। यानी तीन कोच को तीन अलग-अलग ट्रकों पर रखकर ट्रकों पर रखकर लाया जा रहा है। इसके पहुंचते ही तकनीकी टीम द्वारा डिपो में कुछ पार्ट्स को एसेंबल किया जाएगा। जिसमें 10 दिनों का समय लगेगा। मेट्रो का कोच जब डिपो में तैयार हो जाएगा, उसके बाद 6.107 किमी लंबे प्राथमिक कॉरिडोर में इसका ट्रायल होगा।

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प्राथमिक कॉरिडोर के लिए 3 डब्बे वाली एक ट्रेन, मेट्रो लाइन के लिए पटरी, लिफ्ट व एस्केलेटर का क्रय किया गया

जानकारी के अनुसार, जायका फंड से कोच की खरीदारी होनी थी लेकिन फंड मिलने में देरी होने के कारण राज्य सरकार की ओर से दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को निर्धारित समय ट्रेन दोड़ने के लिए 115 करोड़ रुपए दी गई। जिससे प्राथमिक कॉरिडोर के लिए तीन डब्बे वाली एक ट्रेन, मेट्रो लाइन के लिए पटरी, लिफ्ट व एस्केलेटर का क्रय किया गया। पुणे में बनी मेट्रो ट्रेन से पटना वासी करेंगे। आवागमन टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड की ओर से निर्मित ट्रेन का पटना के प्राथमिक कॉरिडोर में इस्तेमाल किया जाएगा। पुणे मेट्रो में ट्रेन डब्बों की आपूर्ति का काम टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड को दिया गया है। जिस कारण इस कंपनी के द्वारा पटना में मेट्रो चलाने के लिए तीन डिब्बे के एक ट्रेन का क्रय किया गया है।

एक कोच में 3 सौ यात्रियों की होगी क्षमता

आपको बता दें कि हर कोच की क्षमता लगभग तीन सौ यात्रियों की होगी ताकि कम खर्च के साथ पर्यावरण को भी नुकसान न हो। तीन कोच में प्रति ट्रिप लगभग नौ सौ यात्री यात्रा करेंगे। प्राथमिक कॉरिडोर में पांच स्टेशन हैं जिसमें न्यू पाटलिपुत्र बस टर्मिनल स्टेशन, जीरो माइल स्टेशन, भूतनाथ स्टेशन, खेमनीचक स्टेशन और मलाही पकड़ी स्टेशन शामिल हैं। हालांकि शुरुआती दौर में खेमनीचक मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन का ठहराव नहीं होगा। यह स्टेशन इंटरचेंज स्टेशन है, जिसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। इंटरचेंज स्टेशन पर पटना मेट्रो कॉरिडोर के दोनों दिशाओं के लिए लोगों को ट्रेन मिलेगी।

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छोटी ट्रेन में ऊर्जा की होगी कम खपत

छोटी ट्रेन से यह भी फायदा होगा कि इसमें प्रति ट्रिप ऊर्जा की कम खपत होगी। तीन कोच वाली मेट्रो केवल ट्रेन की लंबाई को कम करने के बारे में नहीं बल्कि भविष्य के लिए कुशल और कम लागत वाली मेट्रो प्रणाली के साथ शहरी गतिशीलता के उपयोग को अपनाने की तरफ एक कदम है। यात्री संख्या के आकलन को ध्यान में रखते हुए कॉरिडोर-वन और टू को विकसित किया जा रहा है। वहीं दोनों कॉरिडोर यात्रियों के लिए कारगर साबित होगा।

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