Ranchi- केन्द्रीय बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नक्शेकदम पर चलते हुए वित्त मंत्री ने भी अपनी मन की बात की है. इस मन की बात में किसी की सुनवाई नहीं होती, बल्कि सिर्फ बात की जाती है और आदेश दिया जाता है.

बजट में नौजवान, किसान, मजदूर, गरीब, आदिवासी ,दलित, पिछड़ों के लिए कुछ भी नहीं है. न ही इसका देश की जनमानस से कोई लेना-देना है. बजट में ट्रेन में निवेश करने की बात की जा रही है जबकि हकीकत है कि उसी ट्रेन के लिए नौजवानों को पीटा जा रहा है. देश की सारी संपत्तियां बेचकर भारतीय जनता पार्टी 5000 करोड़ की कंपनी बन गई है. इस बजट के बाद राज्यों को केन्द्र की मदद नहीं बल्कि ऋण दिया जाएगा, इस ऋण राज्य सरकारे डुब जाएगी. देश मे वित्तीय संघीय ढांचा को ध्वस्त किया जा रहा है.
काल्पनिक कहानी जैसा है बजट- डॉ0 रामेश्वर उरांव

आम बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वित्तमंत्री डॉ0 रामेश्वर उरांव ने इसे निराशाजनक और काल्पनिक साहित्य जैसा बताया है. दो करोड़ नौकरियों की घोषणा अब घट कर 60 लाख हो गयी. जबकि सच्चाई यह है कि केन्द्र सरकार की गलत नीतियों के कारण वर्ष 2020 में 60.4 करोड़ लोग अत्यंत गरीबी में ढकेल दिए गए. इस बात की बहुत चर्चा की जा रही थी कि कोरोना के बाद ऐसा बजट आएगा कि देश का कायाकल्प हो जाएगा, लेकिन हुआ इसके विपरित. महंगाई से त्रस्त जनता को राहत कैसे मिले, किसानों की आय दुगुनी कैसे हो, बजट में इसकी कोई चर्चा नहीं हैं.
वित्तमंत्री ने कहा है कि सच्चाई यह है कि सालाना प्रति व्यक्ति वास्तविक आय में गिरावट आयी है। वर्ष 2020-21 में प्रति व्यक्ति आय 17589 से गिरकर 16975 रुपये हो गयी, अमृत काल 2022-23 में 80 करोड़ लोग सरकारी मुफ्त अनाज पर आश्रित है, उनको गरीबी से उठाने का सरकार के पास कोई स्पष्ट विजन है. आर्थिक सर्वे के अनुसार सरकार की आय में जबरदस्त उछाल देखा गया, 2020 की तुलना में 64.9 प्रतिशत राजस्व में बढ़ोत्तरी हुई, जबकि ऑक्सफैम रिपोर्ट के अनुसार 2021 के दौरान भारत में 84 प्रतिशत परिवारों की आय घट गयी.
हीरे के गहने सस्ते कर सरकार ने अपना विजन स्पष्ट कर दिया- बादल पत्रलेख
कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि बजट में कहा गया है कि हीरे के गहने सस्ते होंगे, इससे सरकार का विजन स्पष्ट होता है. बजट सिर्फ आय-व्यय का ब्योरा है, आमदनी कहां से होगी यह नहीं बताया गया है. अब जब यूपी में चुनाव होने को है तो भाजपा को गंगा कि किनारे बसे किसानों की याद आ रही है.
नहीं हुई किसानों की आय दुगनी- आलोक दूबे
प्रदेश कांग्रेस के नेता आलोक कुमार दूबे ने कहा कि गंगा किनारे बसे किसानों की याद केंद्र सरकार को चुनाव वर्ष में आयी. हालांकि पिछले चुनावी बजट में किसानों की आय 2022 तक डबल करने की बात कही गयी थी, उसका कोई अपडेट बजट भाषण में नहीं मिला.
बजट में चुनावी राज्यों पर विशेष ध्यान- लाल किशोर नाथ शाहदेव
प्रदेश कांग्रेस नेता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि बजट 2022-23 में चुनावी राज्यों का विशेष ध्यान रखा गया है. महामारी से मार खायी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने जैसी कोई बात नहीं है.
गरीब नहीं गरीबों को मिटाने पर तुली सरकार है- सूर्य कान्त शुक्ला
कांग्रेस नेता और आर्थिक मामलों के जानकार सूर्यकान्त शुक्ला ने कहा कि केंद्र सरकार गरीबी नहीं गरीबों को मिटाने पर तुली हुई है, बजट में मेट्रो ट्रेन का कोई जिक्र नहीं है. रेलवे निजीकरण की बढ़ा है, अब रेलवे में पीपीपी मॉडल से विकास होगा. जबकि 3 साल में 400 नई वंदे भारत ट्रेन की घोषणा की गयी, लेकिन रेलवे के विकास की कोई रूपरेखा पेश नहीं की गयी. रोजगार कैसे बढ़ेगा, बजट में कोई स्पष्टता नहीं है.
समावेशी और हर वक्त को सशक्त बनाने वाला बजट- केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा
केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने उत्कृष्ट बजट पेश करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बधाई देते हुए इसे बजट समावेशी और हर वर्ग को सशक्त बनाने वाला बजट बताया है और कहा है कि यह बजट अगले 25 वर्षों में समृद्ध अर्थव्यवस्था को चलाने का खाका तैयार करेगा.
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