JPSC JSSC भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर 21 अगस्त के बवाल में 15 छात्र नेताओं पर FIR दर्ज हुई है। मंच ने पुलिस की कार्रवाई और मामलों में मौजूदगी पर सवाल उठाये हैं।
JPSC JSSC Protest रांची: JPSC और JSSC भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर राजधानी रांची में 21 अगस्त को हुए बवाल के मामले में पुलिस ने छात्र नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की है। जेपीएसएससी जेएसएससी रिफॉर्म मंच से जुड़े 15 सदस्यों के खिलाफ अलग-अलग थानों में प्राथमिकी दर्ज की गयी है।
मंच के प्रमुख सदस्यों कुणाल प्रताप सिंह, पीयुष कुमार सिंह और रविंद्र पासवान के खिलाफ रांची के कोतवाली और लोअर बाजार थाना में केस दर्ज किया गया है। इन तीनों के खिलाफ उसी दिन हजारीबाग के कोर्रा थाना में भी प्राथमिकी दर्ज होने की बात सामने आयी है।
JPSC JSSC Protest:मारपीट और पुलिस पर हमला करने के आरोप
कोतवाली थाना में दर्ज मामले में तीनों पर मारपीट, पुलिस से धक्का-मुक्की, सरकारी काम में बाधा, महिला से मारपीट और जानलेवा हमला करने जैसे आरोप लगाये गये हैं। लोअर बाजार थाना की प्राथमिकी में भी मारपीट और जानलेवा हमले के आरोप शामिल हैं।
वहीं, हजारीबाग के कोर्रा थाना में दर्ज प्राथमिकी में भी तीनों समेत अन्य लोगों पर मारपीट, पुलिस पर हमला और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप लगाये गये हैं। पुलिस ने झारखंड के एक डिजिटल चैनल के संचालक को भी मामले में आरोपी बनाया है।
Key Highlights
21 अगस्त के प्रदर्शन के बाद 15 छात्र नेताओं के खिलाफ अलग-अलग थानों में FIR दर्ज।
कुणाल प्रताप सिंह, पीयुष कुमार सिंह और रविंद्र पासवान के खिलाफ रांची और हजारीबाग में केस।
आरोपों में मारपीट, पुलिस से धक्का-मुक्की और सरकारी काम में बाधा शामिल।
पुलिस ने एक डिजिटल चैनल के संचालक को भी आरोपी बनाया।
छात्र मंच ने एक ही समय में अलग-अलग जगह दर्ज मामलों में नामजद होने पर सवाल उठाये।
JPSC JSSC Protest:छात्र मंच ने FIR की प्रक्रिया पर उठाये सवाल
पुलिस की कार्रवाई के बाद छात्र नेताओं और जेपीएसएससी जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाये हैं। मंच का कहना है कि रांची और हजारीबाग में एक ही समय के आसपास दर्ज मामलों में तीनों प्रमुख सदस्यों की मौजूदगी कैसे संभव है। मंच का दावा है कि उसके कुछ सदस्य 21 अगस्त के प्रदर्शन में शामिल तक नहीं थे, इसके बावजूद उन्हें प्राथमिकी में आरोपी बनाया गया है। छात्र नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।अब पुलिस के सामने प्राथमिकी में लगाये गये आरोपों की जांच, संबंधित वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने की चुनौती है।


















