दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संस्कार भोज में उमड़ी लाखों लोगों की भीड़, सीएम हेमंत सोरेन ने जताया आभार

रांची. नेमरा की माटी आज फिर भावुक हो उठी, जब लाखों की संख्या में आगंतुक यहां अपने महानायक स्मृति शेष दिशोम गुरु शिबू सोरेन को नमन करने उमड़ पड़े थे। सभी ने स्मृति शेष दिशोम गुरुजी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अद्वितीय योगदान को स्मरण किया।

सीएम हेमंत सोरेन ने सभी आगंतुकों का जताया आभार

सीएम हेमंत सोरेन ने स्मृति शेष शिबू सोरेन जी के संस्कार भोज में शामिल होने के लिए राज्य के कोने-कोने से आए लोगों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि बाबा जब नई दिल्ली के एक अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे, उन कठिन परिस्थितियों में राज्य वासियों का हमारे परिवार को संबल प्राप्त हुआ, उसे कभी भूल नहीं सकता हूं। लोगों ने बाबा की जिंदगी के लिए दुआएं की, लेकिन ईश्वर को शायद कुछ और मंजूर था।

आज दिशोम गुरु हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके अंत्येष्टि संस्कार से लेकर आज के संस्कार भोज में लाखों लोगों का शामिल होना, पूरे श्राद्ध कर्म के दौरान नेमरा आकर उनका हमारे साथ खड़े रहने से हमें और हमारे घर-परिवार को दुःख की इस घड़ी में काफी आत्मबल मिला। राज्य की जनता जिस तरह हमारे साथ हर पल मौजूद रही, वह यह बताने के लिए काफी है कि उनका “बाबा” से कितना गहरा लगाव था। “बाबा” भले ही हमें हमेशा- हमेशा के लिए छोड़कर चले गए हैं, लेकिन, इस राज्य के मार्गदर्शक एवं पथ प्रदर्शक के रूप में वे सदैव याद रखे जाएंगे।

विशिष्ट मेहमानों के साथ लाखों आमजन हुए शामिल

स्मृति शेष दिशोम गुरुजी के संस्कार भोज में अनेक अति विशिष्ट एवं विशिष्ट मेहमानों के साथ लाखों की संख्या में आमजन शामिल हुए। इनमें झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सहित कई मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण, पूर्व मंत्री, सांसद एवं पूर्व विधायकगण, पदाधिकारीगण तथा प्रबुद्धजन शामिल थे।

सभी ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि दी और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से कामना की। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने “गुरुजी” के साथ अपने संबंधों, बिताये गए पलों तथा अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ झारखंड हित की बातें करते थे। उनका इस तरह दुनिया को अलविदा कहना इस राज्य के लिए अपूरणीय क्षति है।

संघर्ष और त्याग की मिसाल थे बाबा

संस्कार भोज में सम्मिलित लोग “दिशोम गुरुजी” की जिंदगी और व्यक्तित्व की ही बातें करते दिखे। उनका कहना था कि उनका जीवन संघर्षों से भरा था, लेकिन उन्होंने संघर्ष को ही अपना हथियार बनाया। “बाबा” का पूरा जीवन इस राज्य की खातिर समर्पित रहा। वे एक तरफ त्याग और संघर्ष की मिसाल थे तो दूसरी तरफ आदिवासी चेतना के वाहक। शोषण एवं अत्याचार के खिलाफ उलगुलान उनकी पहचान बनी तो झारखंड आंदोलन के अग्रदूत भी थे।

झारखंड अलग राज्य बना तो यह उनके ही आंदोलन की ही देन है। वे एक कुशल नेतृत्वकर्ता तथा संगठन कर्ता थे। उन्हें हम ना हम कभी भूले थे, ना भूले हैं और ना ही भूलेंगे। वे हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे। उनके आदर्शों को हम अपने जीवन में आत्मसात करें। उनके दिखाए मार्ग पर चलें, यही उन्हें सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। दिशोम गुरुजी को एक बार फिर शत-शत नमन।

मुकम्मल व्यवस्था

इधर, स्मृति शेष दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संस्कार भोज में मुकम्मल प्रशासनिक व्यवस्था देखने को मिली। यहां योजनाबद्ध तरीके से सारी व्यवस्थायें की गई थी, जिस वजह से आगंतुकों को असुविधाएं नहीं हुई। सुरक्षा के साथ भीड़ नियंत्रण की पुख्ता व्यवस्था थी। लोगों को जानकारी देने के लिए माइक से लगातार अनाउंसमेंट हो रहा था। वाहनों के पार्किंग के विशेष इंतजाम किए गए थे। सभी जवान ड्यूटी पर लगातार मुस्तैद रहे, ताकि किसी को कोई परेशानी नहीं हो।

अति विशिष्ट एवं विशिष्ट मेहमानों के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। पार्किंग स्थल से लोगों को लाने-लेजाने के लिए ऑटो की व्यवस्था थी। यहां आने वाला हर व्यक्ति स्मृति शेष दिशोम गुरु को श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनकी आज से जुड़ी यादें अपने में समाहित कर वापस लौटे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस खातिर स्वयं सभी व्यवस्थाओं पर नज़र रखे हुए थे।

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