CUJ में चार वर्षीय पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष का विद्या आरम्भ, मुख्य अतिथि के तौर पर वैज्ञानिक आदित्य प्रसाद और प्रो. ए. के गांगुली रहे मौजूद

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Ranchi : सीयूजे (CUJ) में चार वर्षीय पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष का विद्यारंभ (दीक्षा-आरम्भ) किया गया। सारे नए विद्यार्थियों का विश्वविद्यालय में स्वागत किया गया और विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम और गतिविधियों से परिचित कराया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, प्रख्यात वैज्ञानिक, पद्मश्री आदित्य प्रसाद दास, पूर्व कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय तमिलनाडु थे। उन्होंने कहा कि विद्यालय से विश्वविद्यालय में आना बड़ी बात होती है। विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अपनी मेहनत और कार्य करते रहना चाहिए। उन्होंने महाभारत के अर्जुन से लक्ष्य प्राप्ति, राम – केवट की कहानी से कार्य के प्रति समर्पित होना और दुनिया की सबसे कम उम्र की नोबेल विजेता, मलाला यूसुफजाई से जीवटता का होना जैसे प्रेरक उदाहरणों से जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

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विद्यार्थियों को अर्जुन से लक्ष्य प्राप्ति, राम-केवट से कार्य के प्रति समर्पित होना और दुनिया की सबसे कम उम्र की नोबेल विजेता, मलाला यूसुफजाई से जीवटता सीखकर जीवन में सफलता की और अग्रसर होना चाहिए-पद्मश्री प्रो. ए. पी. दास

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि, प्रो. ए के गांगुली, निदेशक, आईआईएसईआर, बहरामपुर ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने थॉमस एल्वा एडिशन, सत्य नडेला, सुंदर पिचई और अजय बंगा की कहानियों से सभी नवोदित विद्यार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने विवेकानंद के विख्यात शिकागो भाषण से सभी को सीख लेने की बात की कि कैसे वो विश्व बंधुत्व की बात करते हैं। उन्होंने आगे सबसे ज्यादा उम्र, 97 वर्ष में नोबेल जीतने वाले जॉन बी. गुडएनफ़ से भी सभी विद्यार्थियों को परिचित कराया। उन्होंने कहा कि कार्य करने की कोई उम्र नहीं होती। आप जीवन पर्यंत कार्य करके अपने समाज और विश्व की भलाई कर सकते हैं।

हम सब सामान्य घरों (आर्डिनरी) से आते हैं और अपनी मेहनत और जुनून से हम असाधारण (एक्स्ट्राऑर्डिनरी) बनते हैं-कुलपति, प्रो क्षिति भूषण दास

कार्यक्रम के अध्यक्षीय भाषण में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास ने सभी विद्यार्थियों का स्वागत किया और विश्वविद्यालय से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि हम सब सामान्य घरों (आर्डिनरी) से आते हैं और अपनी मेहनत और जुनून से हम असाधारण (एक्स्ट्राऑर्डिनरी) बनते हैं। अगर हम मिशन और जुनून (पैशन) के साथ काम करते हैं तो हम अपनी संपूर्ण प्रतिभा को ऊंचाई प्रदान कर सकते हैं। आज के समय में डिग्री के साथ काबिलियत की भी जरूरत पड़ती है। उन्होंने विद्यार्थियों से वचन लिया कि वे अपने परिवार, गांव, देश का चिंतन करते हुए संस्कार के साथ मानवता को आगे बढ़ाएंगे।

कार्य करने की कोई उम्र नहीं होती। आप जीवन पर्यंत कार्य करके अपने समाज और विश्व की भलाई कर सकते हैं – प्रो. ए. के गांगुली

कार्यक्रम की शुरुआत में डीन शोध एवं विकास, प्रो. अरुण कुमार पाढ़ी ने सभी गणमान्य अतिथि और नए सत्र में विद्या आरम्भ कर रहे प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने सभी आगंतुकों को गणमान्य अतिथियों से परिचित कराया। आगे कार्यक्रम में डीन अकादमिक, प्रो. मनोज कुमार ने विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम और संबंधित जानकारी दी।
दिन भर चले इस कार्यक्रम में आगे विश्वविद्यालय के अधिकारियों से भी विद्यार्थी रुबरु हुए। परीक्षा नियंत्रक, डॉ बी बी मिश्रा, पुस्तकालयाध्यक्ष, एस के पाण्डेय, डीन-छात्र कल्याण प्रकोष्ठ, डॉ अनुराग लिंडा, और कुलानुशासक, डॉ अमरेंद्र कुमार, ने भी सभी विद्यार्थियों को संबोधित किया अपने विभाग से संबंधित जानकारी दी।

कार्यक्रम में डॉ सुदर्शन यादव के समन्वयन में बने सीयूजे का वीडियो टूर भी विद्यार्थियों को दिखाया गया जिसमें विश्वविद्यालय में मिलने वाले सभी आधारभूत सुविधाओं से रुबरु कराया गया। डॉ शशांक कुलकर्णी ने भारतीय ज्ञान परम्परा से विद्यार्थियों को परिचित कराया। कार्यक्रम में डॉ प्रणय पराशर, डॉ प्रज्ञा शुक्ला, डॉ संहिता सुचरिता, डॉ अमृत कुमार, डॉ एम रामाकृष्णन, डॉ मुकेश जायसवाल आदि मौजूद थे।

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