रेल टेका डहर छेका आंदोलन में जयराम महतो का जोरदार समर्थन, कहा- राजनीतिक साजिश से हटाया गया कुर्मी समुदाय को ST सूची से

बड़काना रेलवे स्टेशन पर कुर्मी समाज ने ST Inclusion के लिए रेल ट्रैक पर धरना दिया, कई ट्रेनें रद्द या दिशा परिवर्तन कर चलानी पड़ी।


गिरिडीह : पूर्वी झारखंड में चल रहे रेल टेका डहर छेका आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता और नेता जयराम महतो ने जोरदार समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि कुर्मी समुदाय को राजनीतिक साजिश के तहत अनुसूचित जनजाति (ST) सूची से हटाया गया है, जिसे पुनः सूची में शामिल करने की उनकी मांग है।  जयराम महतो ने बताया कि झारखंड के गठन के समय झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कुर्मी समुदाय को ST सूची में शामिल करने की मांग अपने मैनिफेस्टो में रखी थी।

पदम श्री विजेता रामदयाल सिंह मुंडा और कोल्हान के दिग्गज नेता बागुन समय ने भी इस मांग का समर्थन किया है। महतो ने कहा कि तीन साल तक उन्होंने इस मुद्दे का गहराई से अध्ययन किया है और समाज के विभिन्न वर्गों से चर्चा की है।  उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आंदोलन केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक अस्तित्व की लड़ाई है। उनके मुताबिक, कुर्मी समुदाय की पहचान, भाषा, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत खतरे में है और इन्हें बचाना जरूरी है।


Key Highlights:

जयराम महतो ने रेल टेका डहर छेका आंदोलन में दिया समर्थन।

कुर्मी समुदाय को राजनीतिक साजिश के तहत ST सूची से हटाने का आरोप।

झारखंड मुक्ति मोर्चा और सामाजिक नेताओं ने पुनः सूची में शामिल करने की मांग की।

आंदोलन को समाज का संघर्ष बताया गया, व्यक्तिगत नारा न लगाने की अपील।

तीन साल के अध्ययन के बाद आंदोलन का समर्थन जताया गया।

कुर्मी समुदाय के अस्तित्व और पहचान की रक्षा को आंदोलन का उद्देश्य बताया।

कोल्हान क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया।


इस दौरान जयराम महतो ने आंदोलन में व्यक्तिगत नारे लगाने से बचने की अपील की और कहा कि यह संघर्ष समाज का है, न कि किसी एक व्यक्ति का। उन्होंने कहा कि धनबाद, बोकारो, गिरिडीह और हजारीबाग जैसे इलाकों में कुर्मी समुदाय की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। महतो ने यह भी कहा कि अगर कुर्मी समुदाय इस लड़ाई से पीछे हटता है तो उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने कोलांचल क्षेत्र के सामाजिक हालात का उदाहरण देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि समुदाय अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाए।

इस आंदोलन में जयराम महतो के अलावा कई समाजसेवी भी समर्थन दे रहे हैं जो कुर्मी समुदाय के पुनः अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल होने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। यह आंदोलन आज सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह समुदाय के अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई है।

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