बिहार चुनाव 2025 : सीट शेयरिंग पर माथापच्ची के बीच 1.77 करोड़ जेन-जी वोटर बना सकते हैं ‘किंगमेकर’
पटना : बिहार विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। पहले चरण के मतदान में अब सिर्फ 29 दिन बचे हैं, लेकिन एनडीए और महागठबंधन (INDIA) दोनों ही सीट शेयरिंग के पेच में उलझे हुए हैं। इधर, राजनीतिक दलों के बीच ‘कौन-सी सीट किसे’ के सवाल पर माथापच्ची जारी है। वहीं उधर 1.77 करोड़ जेन-जी वोटर यानी नई पीढ़ी के मतदाता इस चुनाव में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में उभर सकते हैं।
एनडीए में खींचतान – चिराग के 40 सीटों पर अड़ने से फंसा मामला
वहीं भाजपा, जदयू, हम और लोजपा (आर) के बीच सीट बंटवारे पर सस्पेंस कायम है। सूत्रों के मुताबिक, लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान 40 से अधिक सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं। भाजपा और जदयू चाहती हैं कि समझौता जल्द हो, पर चिराग की जिद के कारण बात नहीं बन पा रही। भाजपा के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने हाल में जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात की लेकिन समाधान नहीं निकला। अब माना जा रहा है कि अमित शाह और जेपी नड्डा को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।

NDA गठबंधन में सीट शेयरिंग की बात करे तो भाजपा 103 सीटों पर दावा करती है
एनडीए गठबंधन में सीट शेयरिंग की बात करे तो भाजपा 103 सीटों पर दावा करती है और 40 सीटिंग विधायकों को प्रचार करने की हरी झंडी भी दे दी है। जदयू 103 सीटें , हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) को लेकर 15 सीटों पर सहमति की संभावना है। वहीं रालोमो (राष्ट्रीय लोक जनशक्ति मोर्चा) का काराकाट, आरा और सहरसा क्षेत्र पर फोकस कर रही है। लोजपा (आर) पार्टी के राज्यव्यापी विस्तार की रणनीति पर काम कर रही है।

INDIA गठबंधन में भी कांग्रेस और राजद में सीटों को लेकर जद्दोजहद की स्थिति है
इंडिया गठबंधन में भी कांग्रेस और राजद में सीटों को लेकर जद्दोजहद की स्थिति है। महागठबंधन (INDIA) की ओर भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। राजद, कांग्रेस, झामुमो, वीआईपी और लेफ्ट दलों के बीच सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय नहीं हो पा रहा है। राजद – 130 सीटों पर दावा, कांग्रेस – 55 सीटें, वामदल – 35 सीटें, झामुमो व रालोजपा ने पांच सीटों की मांग हैं।

VIP (मुकेश सहनी) : 60 सीटों की मांग, जिससे गठबंधन में असहजता
मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी जो 2020 में एनडीए के साथ थी अब महागठबंधन में 60 सीटों की मांग कर रही है। जिनमें से अधिकांश राजद और कांग्रेस की पारंपरिक सीटें हैं। यही कारण है कि तेजस्वी यादव के लिए संतुलन साधना मुश्किल हो गया है। वहीं, माकपा ने इस बार अपनी मांग चार से बढ़ाकर 11 सीटों तक कर दी है। 2020 में पार्टी को चार सीटें मिली थीं और दो पर जीत दर्ज की थी।
जेन-जी वोटर : नई राजनीतिक ताकत का उभार
चुनावी समीकरणों की इस खींचतान के बीच एक नया फैक्टर उभर रहा है। वह है जेन-जी वोटर (Gen-Z Voters)। गौरतलब हो कि बिहार में 7.43 करोड़ मतदाताओं में से 1.77 करोड़ जेन-जी (युवा वोटर) हैं, यानी कुल वोटरों का लगभग 23.8 प्रतिशत। ये वही युवा हैं जिनकी उम्र 18 से 28 साल के बीच है और राजनीति से ज्यादा सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। 2020 में सबसे अधिक वोट पाने वाली पार्टी राजद को 23.11 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि इस बार जेन-जी वोटर का प्रतिशत उससे भी अधिक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर ये युवा सोशल मीडिया पर एकजुट हुए, तो सत्ता समीकरण पूरी तरह पलट सकते हैं।
नेपाल में हाल ही में हुए Gen-Z आंदोलन का उदाहरण सामने है
नेपाल में हाल ही में हुए Gen-Z आंदोलन का उदाहरण सामने है, जहां सोशल मीडिया की ताकत से सत्ता परिवर्तन हुआ। एनडीए और इंडिया गठबंधन जहां सीटों के गणित में फंसे हैं। ऐसे में अगर जेन-जी वोटर की सक्रियता सोशल मीडिया से ग्राउंड तक पहुंची तो बिहार की राजनीति की दिशा बदल सकती है।
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