पेसा नियमावली मामला: झारखंड हाईकोर्ट ने बालू घाटों और लघु खनिजों के आवंटन पर रोक 30 अक्टूबर तक बढ़ाई

रांची. झारखंड में पेसा (PESA) नियमावली लागू न करने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने बालू घाटों और लघु खनिज (माइनर मिनरल्स) के आवंटन पर लगी रोक को 30 अक्टूबर 2025 तक के लिए जारी रखा है।

सरकार ने हाईकोर्ट से मांगा समय

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने हाईकोर्ट से समय देने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि पेसा नियमावली को अंतिम रूप देने के लिए 17 विभागों से मंतव्य (राय) मांगी गई थी, लेकिन अब भी 5 विभागों की राय लंबित है। महाधिवक्ता ने कहा कि सभी विभागों से मंतव्य प्राप्त होने के बाद नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और स्वीकृति मिलते ही नियमावली लागू कर दी जाएगी।

कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख तय की

कोर्ट ने राज्य सरकार के अनुरोध को मानते हुए मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2025 को तय की है। इस दौरान बालू घाटों और माइनर मिनरल्स के आवंटन पर पूर्व में लगाई गई रोक भी प्रभावी रहेगी।

क्या है मामला?

जुलाई 2024 में झारखंड हाईकोर्ट ने कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को दो माह में पेसा नियमावली लागू करने का निर्देश दिया था। सरकार द्वारा अब तक आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने पर “आदिवासी बुद्धिजीवी मंच” की ओर से अवमानना याचिका दायर की गई है।

पेसा कानून का महत्व

पेसा (Panchayats Extension to Scheduled Areas) कानून अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभाओं को अधिक अधिकार देता है, खासकर खनिज संसाधनों के प्रबंधन और स्वशासन के संबंध में। नियमावली लागू होने पर स्थानीय आदिवासी समुदायों को खनिज आवंटन, बालू घाटों की निगरानी और विकास योजनाओं में सीधा भागीदारी का अधिकार मिलेगा।

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