कुड़मी आरक्षण के विरोध में आदिवासी समुदाय की बैठक, जानिए क्या-क्या हुआ

रांची. कुड़मी समुदाय की ST में शामिल किए जाने की मांग के खिलाफ आदिवासी समाज ने एक बार फिर सशक्त और स्पष्ट संदेश देते हुए बैठक और रणनीति निर्माण का दौर तेज कर दिया है। इसी क्रम में आदिवासी नेता लक्ष्मी नारायण मुंडा ने आज आयोजित बैठक में कहा कि 17 अक्टूबर की महारैली आंदोलन आशा से बढ़कर सफल रही और अब यह लड़ाई और भी मजबूती से लड़ी जाएगी।

कुड़मी समुदाय की मांग किसी भी हाल में स्वीकार नहीं

लक्ष्मी नारायण मुंडा ने साफ शब्दों में कहा कि आदिवासी समाज कुड़मी समुदाय की अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किए जाने की मांग को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मांग आदिवासियों की जमीन, आरक्षण, और नौकरी पर कब्जा करने की एक सोची-समझी साजिश है।

निशा भगत पर तीखा हमला

निशा भगत को लेकर भी बैठक में जमकर नाराजगी देखने को मिली। लक्ष्मी नारायण मुंडा ने कहा कि निशा भगत मंच पर बाउंसर के साथ पहुंचीं, जबकि पूरा आदिवासी समाज वहां शालीनता से मौजूद था। “मंच पर नारा लगाया गया कि ‘निशा भगत आई हैं, मंच खाली करो’, ये कहां तक उचित था?”

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि निशा भगत ने माला पहनकर मंच पर एंट्री क्यों ली, जबकि कोई भी गणमान्य व्यक्ति ऐसा नहीं करता। “ये कौन सा भौकाली था? अगर माफी मांग ली जाती तो बात खत्म हो जाती, लेकिन अब तक कोई खेद नहीं जताया गया।”

आदिवासी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब मंच पर देव कुमार धान बोल रहे थे, तो उनका माइक छीन लिया गया। यह आदिवासी नेताओं का अपमान है और इसके खिलाफ समाज चुप नहीं बैठेगा। मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज न सिर्फ बाहरी तत्वों से, बल्कि अपने अंदर के गलत तत्वों से भी लड़ेगा। उन्होंने दोहराया कि आदिवासी समाज का संघर्ष सिर्फ बाहरी कुड़मी समुदाय से नहीं है, बल्कि भीतर के ऐसे तत्वों से भी है जो समाज को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

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