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कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय से फरार दो नाबालिग बिरहोर-बैगा बच्चियां जंगल से बरामद, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

Chatra: जिले के प्रतापपुर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय एक बार फिर विवादों में है। गुरुवार को आदिम जनजाति समुदाय (बैगा-बिरहोर) की दो नाबालिग छात्राएं विद्यालय की पिछली बाउंड्री फांदकर फरार हो गई।
घटना ने न केवल स्कूल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जिला शिक्षा विभाग की निगरानी और जवाबदेही पर भी गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

जंगल से सकुशल बरामद, मगर सुरक्षा पर बड़ा सवालः

प्रतापपुर थाना प्रभारी आलोक रंजन चौधरी ने बताया कि गुरुवार रात करीब 8 बजे उन्हें पुलिस अधीक्षक सुमित अग्रवाल के माध्यम से बच्चियों के लापता होने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने पूरी रात इलाके में सर्च अभियान चलाया। आज सुबह करीब 8 बजे दोनों बच्चियां अपने गांव भुतहा के पास जंगल में मिलीं। उन्हें सकुशल बरामद कर परिजनों के साथ विद्यालय वार्डन सरिता कुमारी को सौंप दिया गया।

वार्डन का बयान और परिजनों का विरोधाभासः

वार्डन सरिता कुमारी ने स्वीकार किया कि बाउंड्री छोटी होने के कारण बच्चियां भागने में सफल हुईं। उन्होंने कहा कि दोनों बच्चियों का नामांकन कल ही हुआ था। उन्हें पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था, इसलिए वे भाग गई। अगर कुछ होता, तो जिम्मेदारी मेरी होती। लेकिन परिजन कैली बैगिन ने इसका तीखा विरोध करते हुए कहा कि उनकी बेटियां जनवरी से ही विद्यालय में पढ़ रही थीं, यानी लगभग 10 महीने से। कैली बैगिन ने बताया कि वार्डन ने बच्चियों को वापस लेने के लिए दबाव डालते हुए कहा कि आप अपने बच्चों को इस स्कूल से ले जाइए, मैं इनकी पढ़ाई नहीं करा सकती। ये बार-बार भाग जाती हैं।

पहले भी हुई ऐसी घटनाः

यह कोई पहली घटना नहीं है। करीब एक साल पहले भी इसी विद्यालय से दो छात्राएं रात में गायब हो गई थीं। मगर उस समय भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। इस बार भी बच्चियों के जंगल में मिलने के बाद प्रशासन सिर्फ सफाई देने के बजाय जवाबदेही तय करने से बचता दिख रहा है।

DEO की सफाई और शिक्षा विभाग पर सवालः

घटना की जानकारी मिलते ही जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) दिनेश कुमार मिश्रा विद्यालय पहुंचे, लेकिन उन्होंने भी जांच या कार्रवाई के बजाय सफाई देते हुए कहा कि बच्चियां कह रही थीं कि उनके गांव की अन्य लड़कियां यहां आएंगी, तब वे भी लौट आएंगी। उनकी यह टिप्पणी तब आई, जब परिजन वार्डन पर बच्चियों को वापस भेजने का आरोप लगा रहे थे। यह रवैया स्पष्ट करता है कि शिक्षा विभाग निचले स्तर की गंभीर लापरवाहियों पर आंख मूंदे बैठा है।

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की मांगः

स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वार्डन के निलंबन, स्कूल की सुरक्षा जांच, और DEO स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर बच्चियां जंगल से सुरक्षित नहीं मिलतीं, तो यह एक बड़ी घटना हो सकती थी

रिपोर्टः सानू भारती

 

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