सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा- बिहार में उद्योगों का NDA ने किया बुरा हाल

पटना : कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी और एआईसीसी के कार्यसमिति सदस्य व राज्यसभा के सांसद डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के सांसद प्रमोद तिवारी ने आज संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा सवाल किया। वें आज सीतामढ़ी और बेतिया की धरती से तीन सवाल बिहार पूछे हैं।

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बिहार को 7 ‘पीएम-मित्रा टेक्सटाइल पार्क’ में एक भी क्यों नहीं मिला? – MP प्रमोद तिवारी

सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि आज जब आप आठ नवंबर 2025 को पश्चिम चंपारण जिले के मुख्यालय बेतिया में जनता को संबोधित कर रहे हैं तो बिहार आपसे एक सीधा सवाल पूछना चाहता है। बिहार को सात ‘पीएम-मित्रा टेक्सटाइल पार्क’ में एक भी क्यों नहीं मिला? वर्ष 2021-22 में आपके वस्त्र मंत्रालय ने Prime Minister Mega Integrated Textile Region and Apparel योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत देश में सात मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने की घोषणा की गई थी अवधि 2021-22 से 2027-28 तक। मई 2023 में केंद्र सरकार ने सात राज्यों का चयन किया। इन सात राज्यों में से एक भी बिहार नहीं था। जबकि सांप्रदायिक बयानों के जिम्मा संभाल रहे गिरिराज सिंह आपकी ही सरकार के कपड़ा मंत्री भी है।

जो बिहार से सांसद हैं, अपने ही राज्य को इस योजना में एक भी पार्क नहीं दिला पाए – कांग्रेस

उन्होंने कहा कि जो बिहार से सांसद हैं, अपने ही राज्य को इस योजना में एक भी पार्क नहीं दिला पाए। इसी बीच बिहार सरकार ने दावा किया कि वह ‘मिथिला मेगा टेक्सटाइल एंड डिजाइन पार्क’ और ‘अंग मेगा सिल्क पार्क’ के जरिए राज्य को दक्षिण एशिया का टेक्सटाइल हब बनाएगी यह दावा एनडीए के संकल्प पत्र (2025) में भी किया गया है। लेकिन वस्त्र मंत्रालय ने लोकसभा में लिखित उत्तर (सत्र: फरवरी 2025) में साफ कहा कि बिहार से PM-MITRA के लिए कोई प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुआ है, और 2027-28 तक ऐसी कोई योजना नहीं है। बिहार के लिए कोई नया टेक्सटाइल पार्क स्वीकृत नहीं है।

सीता माता के अपमान पर बिहार की धरती जवाब चाहती है – प्रमोद तिवारी

प्रमोद तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री से सीधा सवाल कि सीता माता के अपमान पर बिहार की धरती जवाब चाहती है। बिहार की पवित्र भूमि, जो माता जानकी की जन्मस्थली के रूप में करोड़ों भारतीयों की आस्था का केंद्र है, उसका भाजपा सरकार ने संसद में घोर अपमान किया था। तथ्य यह है कि 12 अप्रैल 2017 को राज्यसभा में तत्कालीन भाजपा सांसद प्रभात झा के प्रश्न (प्रश्न संख्या-1703) के उत्तर में केंद्र की भाजपा सरकार ने यह कहा था कि माता सीता के सीतामढ़ी (बिहार) में जन्म लेने के कोई ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। यह उत्तर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा दिया गया था। यह बयान न केवल धार्मिक भावनाओं पर आघात था, बल्कि बिहार के गौरव, मिथिला की अस्मिता और देश की आध्यात्मिक परंपरा का भी सीधा अपमान था।

कांग्रेस ने आस्था को सम्मान और आकार दिया, भाजपा ने अपमान किया – सांसद प्रमोद

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आस्था को सम्मान और आकार दिया, भाजपा ने अपमान किया कांग्रेस सरकार ने 2011 में ही भारत की धार्मिक विरासत को सहेजने और पर्यटन के रूप में विकसित करने का प्रयास किया। एक जुलाई 2011 को IL&FS IDC Ltd. को राष्ट्रीय स्तर का सलाहकार नियुक्त किया गया। इस सलाहकार ने 2013 तक रामायण सर्किट, बौद्ध सर्किट, जैन सर्किट और सूफी सर्किट की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, जिसे केंद्र की कांग्रेस सरकार ने स्वीकार किया। रामायण सर्किट में विशेष रूप से बिहार के वे स्थल शामिल किए गए जो भगवान राम और माता सीता से जुड़े हैं, जैसे सीतामढ़ी (पुनौरा धाम), जानकी मंदिर, हलेश्वर स्थान, पंथ पकड़, अहिल्या स्थान, फुल्लहर, चंकीगढ़ और वाल्मीकि नगर आदि। यही वह सर्किट था जिसने बिहार की धार्मिक विरासत को देश और विश्व से जोड़ा।

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स्नेहा राय की रिपोर्ट

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