जेपीएससी के पत्र से झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसरों की प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति अटक गई है। रांची विवि के 48 शिक्षक प्रभावित।
जेपीएससी Letter Impact रांची:झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसरों की प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति की प्रक्रिया जेपीएससी के एक पत्र के बाद बीच में अटक गई है। आयोग ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों से यह स्पष्ट जानकारी मांगी है कि एसोसिएट प्रोफेसर में हुई पिछली प्रोन्नतियों से संबंधित अधिसूचनाएं उपलब्ध कराई जाएं। इस कदम का सीधा असर रांची विश्वविद्यालय के लगभग 48 और डीएसपीएमयू के तीन एसोसिएट प्रोफेसरों पर पड़ रहा है।
Key Highlights
जेपीएससी ने राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों से विस्तृत जानकारी मांगी
रांची यूनिवर्सिटी के करीब 48 और डीएसपीएमयू के 3 एसोसिएट प्रोफेसरों की प्रोन्नति पर असर
आयोग ने प्रोन्नति अधिसूचना, वेतन निर्धारण पत्र और PhD प्रमाणपत्र मांगे
विश्वविद्यालयों में प्रोमोशन प्रक्रिया पर असमंजस, शिक्षकों में बढ़ी चिंता
कुलपति ने नई अधिसूचना जारी करने से इनकार किया, शिक्षक परेशान
जेपीएससी Letter Impact:
आयोग ने विश्वविद्यालयों से पूछा है कि क्या एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति के लिए जेपीएससी की सेवा सहमति आवश्यक होती है या नहीं। इस सवाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को असमंजस में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि कई मामलों में विश्वविद्यालय स्तर पर ही वेतन निर्धारण करते हुए शिक्षकों को एसोसिएट प्रोफेसर का वेतनमान लागू कर दिया गया था, लेकिन संबंधित अधिसूचना जारी नहीं की गई।
जेपीएससी Letter Impact:
जेपीएससी ने प्रोन्नति की अधिसूचना के साथ-साथ शिक्षकों से व्याख्याता पद पर वास्तविक नियुक्ति तिथि, एसोसिएट प्रोफेसर पद पर वेतन निर्धारण के आदेश और नवीनतम वेतन विवरणी भी मांगी है। इसके अलावा PhD अवार्ड से संबंधित प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने को कहा गया है।
जेपीएससी Letter Impact:
आयोग का पत्र मिलने के बाद कई एसोसिएट प्रोफेसर कुलपति के पास पहुंचे और प्रोन्नति अधिसूचना जारी करने का आग्रह किया, ताकि दस्तावेज आयोग को भेजे जा सकें। लेकिन कुलपति ने अधिसूचना जारी करने से साफ इंकार कर दिया है। इससे शिक्षकों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि बिना अधिसूचना के वे आयोग के समक्ष आवश्यक कागजात प्रस्तुत नहीं कर पा रहे।
जेपीएससी Letter Impact:
अब पूरा मामला विश्वविद्यालयों और आयोग के बीच स्पष्टता पर अटका हुआ है। शिक्षकों का कहना है कि अधिसूचना जारी न होने से उनकी प्रोफेसर पद पर संभावित प्रोन्नति सीधे प्रभावित हो रही है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि प्रोन्नति प्रक्रिया से संबंधित कई मामलों पर अभी निर्णय स्पष्ट नहीं है।
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