मुख्यमंत्री ने उद्योग विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, अधिकारियों को दिए निर्देश

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज एक अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ में उद्योग विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अगले पांच वर्ष में राज्य के औद्योगिक विकास हेतु तैयार की गयी कार्य योजना प्रस्तुत की। इस दौरान उन्होंने दो दशक की औद्योगिक विकास गाथा, प्रमुख औद्योगिक इकाईयों, बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025, बिहार में उद्यमिता एवं स्वरोजगार हेतु प्रयास, आगामी पांच वर्षों के लिये ‘बिहार औद्योगिक संकल्प’ सहित अन्य महत्त्वपूर्ण बिंदुओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा दिया जाएगा – CM नीतीश कुमार

उन्होंने बताया कि यहां ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा दिया जाएगा। आधुनिक फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के साथ पांच नए मेगा फूड पार्क स्थापित किए जाएंगे। 10 औद्योगिक पार्क एवं 100 एमएसएमई पार्कों का विकास किया जाएगा। उद्योग प्रासंगिक कौशल और उद्यमिता में अधिक से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा। डोभी, गयाजी में 1700 एकड़ में फैले इंटिग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना प्रक्रिया को तीव्र गति से बढ़ाया जा रहा है। राज्य के 29 जिलों में फैले 14,036 एकड़ क्षत्र में इंटिग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के जैसे 31 नए अत्याधुनिक औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे।

राज्य की तेज आर्थिक तरक्की और रोजगार पैदा करने के लिए वृहद पैमाने पर औद्योगीकरण का होना जरूरी है – मुख्यमंत्री

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सभी जानते हैं कि किसी भी राज्य की तेज आर्थिक तरक्की और रोजगार पैदा करने के लिए वृहद पैमाने पर औद्योगीकरण का होना जरूरी है। बिहार सरकार ने इस दिशा में काफी काम किया है। औद्योगिक क्षेत्रों की संख्या जो वर्ष 2005 में 46 थी, वह बढ़कर अब वर्ष 2025 में 94 हो गई है। औद्योगिक इकाईयों की संख्या वर्ष 2005 में 1674 थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 3500 हो गई है। इसी प्रकार वर्ष 2005 में बिहार से औद्योगिक उत्पादों का निर्यात जो मात्र 25 करोड़ रुपए था, वह बढ़कर वर्ष 2025 में 17 हजार करोड़ रुपए हो गया है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की संख्या 2005 के मुकाबले 72 हजार से बढ़कर 2025 में 35 लाख हो गई है और बिहार के जीएसडीपी में उद्योगों का योगदान वर्ष 2005 के 5.4 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025 में 21 प्रतिशत से भी अधिक हो गया है। यह सरकार द्वारा बिहार के औद्योगिक विकास हेतु किए गए प्रयासों को दर्शाता है।

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उद्यम निदेशालय की स्थापना व सभी जिलों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम केंद्र स्थापित करना शामिल है

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बिहार को भारत के शीर्ष पांच निवेश अनुकूल राज्यों में सम्मिलित करने हेतु उद्योग विभाग देश-दुनिया के प्रमुख वाणिज्यिक केंद्रों में निवेशक सम्मेलनों का आयोजन करेगा, ताकि बड़े से बड़े उद्योगों को आकर्षित किया जा सके। हमलोगों ने अगले पांच वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश की कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत Ease of Doing Business (EoDB) को बढ़ावा देना, आधुनिक फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के साथ पांच नए मेगा फूड पार्क स्थापित करना, राज्य में 10 औद्योगिक पार्क एवं 100 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम पार्कों को विकसित करना, उद्योग-प्रासंगिक कौशल एवं उद्यमिता में सात लाख लोगों को प्रशिक्षित करना तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशालय की स्थापना एवं सभी जिलों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम केंद्र स्थापित करना शामिल है। इसके साथ ही स्थानीय उत्पादों के निर्यात एवं बाजार की सुविधा उपलब्ध कराना प्रमुख है।

उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत कुल 44,073 उद्यमियों को प्रोत्साहन राशि दी गई है

राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत कुल 44,073 उद्यमियों को प्रोत्साहन राशि दी गई है। इससे लोग अपना खुद का उद्योग/कारोबार कर रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। बिहार को पूर्वी भारत का नया टेक हब बनाने के उद्देश्य से डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, मेगा टेक सिटी एवं फिनटेक सिटी की स्थापना हेतु कार्य योजना के निर्माण व उसके कार्यान्वयन के सतत अनुश्रवण के लिए शीर्ष समिति का गठन किया गया है। साथ ही बिहार को एक ‘वैश्विक Back end-Hub’ एवं ‘ग्लोबल वर्क प्लेस’ के रूप में विकसित एवं स्थापित करने हेतु कार्य योजना बनाकर उसके कार्यान्वयन के लिए सतत अनुश्रवण करने के लिए एक शीर्ष समिति का गठन किया गया है। इसके अलावा प्रतिभाशाली युवाओं एवं उद्यमियों को राज्य अंतर्गत स्टार्टअप एवं अन्य न्यू एज इकोनॉमी प्रक्षेत्र के रोजगारोन्मुखी गतिविधियों को विस्तारित करने हेतु कार्य योजना बनाकर उसके कार्यान्वयन एवं सतत अनुश्रवण की व्यवस्था की गई है।

बिहार में अब उद्योगों की स्थापना के लिए सभी गुणवत्तापूर्ण आधारभूत संरचनाएं उपलब्ध हैं

गयाजी के डोभी में लगभग 1,700 एकड़ में फैले Integrated Manufacturing Cluster (IMC) की स्थापना प्रक्रिया को तीव्र गति से आगे बढ़ाया जा रहा है और जल्द ही उसका शुभारंभ भी कर दिया जाएगा। राज्य के 29 जिलों के 14,036 एकड़ भूमि पर फैले Integrated Manufacturing Cluster (IMC) मॉडल की तर्ज पर 31 नए अत्याधुनिक औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे, जिसमें 10 सेक्टर-विशेष पार्क जैसे कि टेक्सटाइल पार्क, फार्मा पार्क आदि शामिल होंगे। राज्य में तीव्र औद्योगिक विकास पर कुल 26 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। बिहार में अब उद्योगों की स्थापना के लिये सभी गुणवत्तापूर्ण आधारभूत संरचनाएं उपलब्ध हैं, जैसे अच्छे सड़क मार्ग, रेलवे एवं हवाई मार्ग से अच्छी सम्पर्कता, निर्बाध विद्युत आपूर्ति। राज्य में कानून का राज स्थापित है एवं विधि व्यवस्था की स्थिति काफी बेहतर है। साथ ही हमलोग यह भी सुनिश्चित करेंगे कि राज्य के युवाओं को रोजगार के लिए किसी मजबूरी में राज्य से बाहर नहीं जाना पड़े।

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CM के साथ डिप्टी सीएम, कई मंत्री व कई अधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में उद्योग विभाग के कार्यों से संबंधित एक वीडियो फिल्म प्रस्तुत की गई। बैठक में उपमुख्यमंत्री स्रमाट चौधरी, जल संसाधन सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी डॉ. गोपाल सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह, उद्योग विभाग के निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता एवं उद्योग विभाग (तकनीकी विकास) के निदेशक शेखर आनंद मौजूद थे।

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