नई दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र के 7वें दिन लोकसभा के अंदर चुनाव सुधार पर चर्चा हो रही है। इस चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने की। इस चर्चा में हिस्सा लेते हुए जनता दल यूनाइटेड (JDU) सांसद और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने विपक्ष को जमकर सुनाया। ललन ने कहा कि मनीष तिवारी वरिष्ठ वकील हैं। उन्होंने जब चर्चा शुरू की तो लगा कि सकारात्मक सुझाव आएंगे, लेकिन जब उनका भाषण सुना तो मुझे आश्चर्य हुआ कि एक वरिष्ठ अधिवक्ता होते हुए जिन सवालों को उन्होंने उठाया, उसका इस सदन से कोई लेना देना है। उन्होंने चुनाव आयोग पर सवाल उठाया और संवैधानिक संस्थाओं पर हम यहां चर्चा नहीं कर सकते। हमको आश्चर्य हुआ इस बात पर कि एक पढ़ा लिखा आदमी जिसको संविधान के बारे में पता है वो भी इस तरह की चर्चा कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा- चुनाव आयोग को हम प्रभावित नहीं करते हैं
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग को हम प्रभावित नहीं करते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार किसी संवैधानिक संस्थाओं के काम में कभी हस्तक्षेप नहीं करती। गिल साहब देश में बड़ा उदाहरण हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त से रिटायर हुए और मनमोहन सिंह की सरकार में मंत्री बन गए थे। मोदी सरकार को लेकर ऐसा कोई उदाहरण नहीं है। जो सर्वोच्च न्यायालय में बैठे जज को भी कांग्रेस राज्यसभा में लेकर आई थी। ये काम आपका है।
ललन सिंह ने आगे कहा- अलिखेश यादव जी, ज्यादा उधर मत सटिए…
ललन सिंह ने आगे कहा कि सपा प्रमुख व सांसद अलिखेश प्रसाद यादव, ज्यादा उधर मत सटिए। नहीं तो बिहार में जिस तरह तेजस्वी यादव का हाल हुआ है, वैसा ही आपका हो जाएगा। मनीष तिवारी विद्वान हैं और ऐसी बात कर रहे हैं। जहां तक एसआईआर की बात है, उस पर चर्चा करना हमारा हक नहीं है। यह चुनाव आयोग का काम है। संविधान ने उनको यह दायित्व दिया है। एक नागरिक की हैसियत से हमको जो अनुभव है, किसी भी दृष्टिकोण से गलत नहीं है। शत प्रतिशत सही है।

2003 में SIR हुआ था और 2025 में अब कराया जा रहा है – ललन सिंह
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2003 में एसआईआर हुआ था और 2025 में अब कराया जा रहा है। 11 विकल्पों के साथ देश के नागरिकों को प्रमाण पत्र पेश करना है। इससे किसी को क्या दिक्कत हो सकती है। हमने भी अपना फॉर्म जमा किया था। जब एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई, तब बिहार के दो जिलों में तीन महीने में पांच लाख लोगों ने प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। एसआईआर पर तो सुप्रीम कोर्ट में बहस हो चुका. वहां तो मनीष ने कोई ठोस सबूत नहीं दिया, लेकिन यहां आप बहस कर रहे हैं. आप ईवीएम पर सवाल उठा रहे हैं।
डॉ. मनमोहन सिंह 10 साल तक सरकार चला चुके हैं – केंद्रीय मंत्री
केंद्रीय मंत्री को यह भी बताना चाहिए कि डॉ. मनमोहन सिंह 10 साल तक सरकार चला चुके हैं। उनके समय कौन सा ईवीएम था और अब कौन सा ईवीएम काम कर रहा है। लगातार प्रयास करने के बाद भी आपको जनता नहीं चुन रही है तो ईवीएम गलत है। सीधी बात यह है कि आप बूथ नहीं लूट पा रहे हैं। आप पश्चिम बंगाल जीत जाते हैं तो ईवीएम सही, कर्नाटक जीत जाते हैं तो ईवीएम सही है, तेलंगाना जीत हाते हैं तो ईवीएम सही है। महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार हारते हैं तो ईवीएम गलत हो जाता है। आपका यही दोहरा चरित्र देश के लोग पहचानते हैं और भरोसा नहीं करते हैं।
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अंशु झा की रिपोर्ट
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