रांची नगर निगम चुनाव में पहली बार ट्रिपल टेस्ट के तहत OBC आरक्षण लागू। नए आरक्षण रोस्टर से कई निवर्तमान पार्षद बाहर, 25 वार्ड महिला आरक्षित।
रांची नगर निगम Election रांची: रांची में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य में पहली बार ट्रिपल टेस्ट के तहत नगर निकाय चुनाव कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में रांची नगर निगम के लिए नया आरक्षण रोस्टर तैयार कर जिला प्रशासन ने राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया है। इसी रोस्टर के आधार पर आगे की पूरी चुनावी प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी।
रांची नगर निगम Election: OBC आरक्षण के साथ बदली चुनावी तस्वीर
नए आरक्षण रोस्टर में पहली बार ओबीसी वर्ग को स्पष्ट आरक्षण दिया गया है। इसके तहत ओबीसी वन के लिए नौ और ओबीसी टू के लिए चार सीटें आरक्षित की गई हैं। अनुसूचित जाति समाज को दो सीटें मिली हैं, जबकि अनुसूचित जनजाति के लिए 11 सीटें आरक्षित रखी गई हैं। आरक्षण तय करते समय इस बात का ध्यान रखा गया है कि कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से कम रहे।
Key Highlights
• रांची नगर निगम चुनाव में पहली बार ट्रिपल टेस्ट लागू
• ओबीसी वन को 9 और ओबीसी टू को 4 सीटों का आरक्षण
• 53 में से 25 वार्ड महिला के लिए आरक्षित
• निवर्तमान उप महापौर संजीव विजयवर्गीय नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
• वार्ड 18 सामान्य होने से नए राजनीतिक चेहरे की एंट्री संभव
रांची नगर निगम Election:महिला आरक्षण से कई दिग्गज बाहर
नए रोस्टर ने कई निवर्तमान पार्षदों और नेताओं का चुनावी गणित बिगाड़ दिया है। निवर्तमान उप महापौर संजीव विजयवर्गीय इस बार चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, क्योंकि उनके पूर्व के वार्ड आठ और दस को महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया है। आसपास के वार्ड छह, सात और नौ भी महिला आरक्षित होने के कारण उनके विकल्प सीमित हो गए हैं।
इसी तरह वार्ड 26 के पार्षद अरुण कुमार झा, वार्ड 27 के पार्षद ओमप्रकाश और वार्ड 11 की पार्षद रंजू सिंह भी नए आरक्षण रोस्टर के कारण चुनावी दौड़ से बाहर हो गए हैं।
रांची नगर निगम Election: कुछ वार्ड सामान्य हुए, नए चेहरों की एंट्री संभव
वार्ड 18 थड़पखना जो पहले महिला के लिए आरक्षित था, इस बार सामान्य कर दिया गया है। यहां से सांसद महुआ माजी के बेटे सोमवित माजी के चुनावी मैदान में उतरने की संभावना जताई जा रही है। वहीं वार्ड दो को अनुसूचित जाति सामान्य से महिला कर दिया गया है और वार्ड पांच को एससी महिला से एससी सामान्य बनाया गया है। इन बदलावों से कई वार्डों में नए प्रत्याशियों के लिए रास्ता खुल सकता है।
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