झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर आदिवासी जमीन हड़पने और शिड्यूल एरिया खत्म करने का आरोप लगाया। Hindalco Renewal पर भी सवाल उठाए।
Former Chief Minister Champai Soren makes a serious allegation: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने आज एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस (PC) में राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार कॉरपोरेट कंपनियों के हित में काम कर रही है, जबकि आदिवासी समाज के अधिकार, जमीन और अस्तित्व को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। चंपई सोरेन ने Hindalco समेत कई प्रोजेक्ट्स पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने शिड्यूल एरिया और पेसा कानून की आत्मा को कमजोर किया है।
Key Highlights
• पूर्व मुख्यमंत्री ने Hindalco Renewal और कॉरपोरेट हितों पर सवाल उठाए
• सरकार पर शिड्यूल एरिया और आरक्षित क्षेत्र खत्म करने का गंभीर आरोप
• आदिवासी जमीन, जंगल, गांव और खनिज संपदा के दोहन पर तीखी टिप्पणी
• डेमोग्राफिक बदलाव और बांग्लादेशी घुसपैठ को बसाने का आरोप
• चेतावनी – आने वाले दिनों में होगा बड़ा जन आंदोलन, अनुसूचित क्षेत्र नहीं खत्म होने देंगे
Former Chief Minister Champai Soren makes a serious allegation: शिड्यूल एरिया खत्म करने का आरोप
चंपई सोरेन ने कहा कि झारखंड की पहचान इसकी आदिवासी संस्कृति, जमीन, गांव और जंगल हैं, लेकिन आज इन्हें systematically खत्म किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि गांव और जंगल को उजाड़कर टाटा जैसे कॉरपोरेट शहर बसाए गए और अब उसी तर्ज पर खनिज संपदा का दोहन जारी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि “सरकार किस अधिकार से आरक्षित क्षेत्रों और शिड्यूल एरिया की सीमाएं बदल रही है?”
Former Chief Minister Champai Soren makes a serious allegation: Hindalco Renewal और कॉरपोरेट नीति पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि Hindalco कंपनी को लेकर सरकार का रुख साफ नहीं है।
उन्होंने कहा कि “क्यों टाटा और Hindalco जैसी कंपनियों को Renewal दिया जाएगा, जब उनकी मौजूदगी ने आदिवासियों की भूमि, पेड़-पौधे और खनिज संपदा को खत्म कर दिया?”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आने वाले समय में आदिवासी आंदोलन तेज होगा।
Former Chief Minister Champai Soren makes a serious allegation: आदिवासी अस्तित्व और जनसांख्यिकीय बदलाव की चिंता
चंपई सोरेन ने डेमोग्राफी बदलने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने कहा कि “डेमोग्राफी बदलकर मूलवासी-आदिवासी को अल्पसंख्यक बनाने की योजना चल रही है। कोपली नगर पंचायत इसका उदाहरण है, जहां 1995 में एक भी घर नहीं था, लेकिन आज 35 वोटर कैसे आ गए?”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपने निर्णय वापस नहीं लिए तो 2025 में बड़ा जन आंदोलन होगा।
चंपई सोरेन ने अंत में स्पष्ट कहा – “अनुसूचित क्षेत्रों को खत्म नहीं होने देंगे।” उन्होंने सरकार से मांग की कि वह आदिवासी समाज की भूमि व अधिकारों की रक्षा के लिए अविलंब निर्णय ले और पेसा तथा शिड्यूल एरिया कानून का पालन सुनिश्चित करे।
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