सेवा और शिक्षा का अद्वितीय संगम, जे रॉय सर का समाजसेवी प्रयास

पटना : शिक्षा जगत में उत्कृष्ट योगदान और सामाजिक सरोकारों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का नाम जे रॉय सर है। वे स्‍मृति जुपिटर इंस्टीट्यूट के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक हैं और पिछले कई वर्षों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा दे चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में असंख्य छात्र-छात्राओं ने आईआईटी जी, नीट और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। जे रॉय सर न केवल एक सफल शिक्षाविद् हैं बल्कि विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक भी रहे हैं।

जे रॉय सर शिक्षा के साथ-साथ वे समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्ग के उत्थान के लिए सदैव सक्रिय रहते हैं

शिक्षा के साथ-साथ वे समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्ग के उत्थान के लिए सदैव सक्रिय रहते हैं। इसी कड़ी में 27 दिसंबर को उनके द्वारा कंबल वितरण समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शाम तीन बजे से आरंभ हुआ। जिसका उद्देश्य शारीरिक रूप से दिव्यांगजन, रिक्शा चालक, मजदूर व आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ठंड से राहत उपलब्ध कराना था। समारोह में बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोग उपस्थित हुए और सभी को सम्मानपूर्वक कंबल वितरित किए गए। कार्यक्रम के सफल संचालन में पुलिस अधीक्षक (SP) एवं उनकी टीम का विशेष सहयोग सराहनीय रहा। भीड़ अधिक होने के बावजूद व्यवस्था एवं सुरक्षा का उत्कृष्ट प्रबंधन किया गया। सुरक्षा कर्मियों ने जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न कराया।

औपचारिकता निभाने के बजाय जे रॉय सर ने सेवा के भाव को प्राथमिकता दी

विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह रहा कि मात्र औपचारिकता निभाने के बजाय जे. रॉय सर ने सेवा के भाव को प्राथमिकता दी। कड़ाके की ठंड और देर रात होने के बावजूद वे स्वयं टीम के साथ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचे और सड़कों व फुटपाथों पर रहने वाले बेसहारा लोगों को शेष कंबल वितरित करते रहे। इस मानवीय पहल ने न केवल जरूरतमंदों को राहत दी बल्कि समाज के सामने एक प्रेरक संदेश भी रखा। इस सामाजिक पहल में उनके प्रिय सहयोगी एवं मित्र अमित का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा। जिन्होंने पूर्ण समर्पण के साथ कार्यक्रम की विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग किया।

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शिक्षा मनुष्य को सक्षम बनाती है और सेवा उसे संवेदनशील – जे रॉय सर

जे. रॉय सर का मानना है कि शिक्षा मनुष्य को सक्षम बनाती है और सेवा उसे संवेदनशील। यही कारण है कि वे शिक्षा और सेवा दोनों क्षेत्रों में समान ऊर्जा और निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं। विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के साथ-साथ समाज के वंचित वर्ग के प्रति जिम्मेदारी का यह अद्भुत संतुलन उन्हें एक विशिष्ट व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करता है। आज के समय में ऐसे शिक्षाविद् और समाजसेवी व्यक्तित्व विरले ही देखने को मिलते हैं जो अपनी सफलता को समाज के साथ साझा करते हैं। जे रॉय सर की यह पहल न केवल मानवीय मूल्यों को सशक्त बनाती है बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि सच्ची सफलता वही है जो दूसरों के जीवन में उजाला भर सके।

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