Mithilakshar Literacy अभियान का 12वां सम्मान समारोह सम्पन्न, भाषा संरक्षण पर जोर

हरमू रांची में मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश फोरम द्वारा मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान का 12वां सम्मान समारोह सम्पन्न, मैथिली और मिथिलाक्षर संरक्षण पर वक्ताओं ने जोर दिया।


 Mithilakshar Literacy  रांची. राजधानी रांची के हरमू स्थित विद्यापति दालान में रविवार को मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के 12वें सम्मान समारोह का भव्य आयोजन हुआ। मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश फोरम द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम का यह अंतिम दिन था, जिसकी शुरुआत भगवती वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।

 Mithilakshar Literacy : समारोह में विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति, मुख्य विषय रहा – भाषा और लिपि संरक्षण

समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. महेन्द्र झा, विशिष्ट अतिथि नवीन झा तथा झारखंड मैथिली मंच के महासचिव एवं अध्यक्ष जयंत कुमार झा सहित कई गणमान्य उपस्थित थे। मंच संचालन वरिष्ठ अभियानी विक्रमादित्य सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन समीर कुमार मिश्र ने दिया।
पं. अजय नाथ झा शास्त्री ने सभी अभियानियों एवं अतिथियों का स्वागत करते हुए मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान की यात्रा, उपलब्धियाँ और प्रकल्पों की जानकारी प्रस्तुत की।


Key Highlights

• हरमू रांची में मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान का 12वाँ सम्मान समारोह सम्पन्न

• मैथिली भाषा और मिथिलाक्षर लिपि संरक्षण पर अतिथियों ने दिया जोर

• भाषायी उपयोग को परिवार और व्यवहार में शामिल करने की अपील

• अभियान अब मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश फोरम के अंतर्गत विस्तारित प्रकल्प

• समापन में भगवती वंदना, दीप प्रज्ज्वलन और सामूहिक स्तुति गायन


 Mithilakshar Literacy : मिथिलाक्षर संरक्षण के महत्व पर बल – अतिथियों के वक्तव्य

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पूर्व पार्षद अरुण कुमार झा ने कहा कि मिथिलाक्षर लिपि का संरक्षण केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि धार्मिक कर्तव्य भी है। उन्होंने देवनागरी के स्थान पर मिथिलाक्षर के व्यवहारिक उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
मुख्य अतिथि डॉ. महेन्द्र झा ने कहा कि झारखंड में मैथिली और मिथिलाक्षर के संरक्षण के लिए बड़ी संख्या में प्रतिबद्ध लोग हैं, इसलिए भाषा उत्थान की दिशा में यहाँ असीम संभावनाएँ हैं।
अध्यक्षीय उद्बोधन में जयंत कुमार झा ने कहा कि मिथिलाक्षर एक प्राचीन एवं सशक्त लिपि है, जिसका सूत्र फिर से जोड़ना समय की मांग है। इसके लिए सामूहिक जागरूकता और सतत प्रयास जरूरी हैं।

 Mithilakshar Literacy : अभियान का विस्तार – ‘वटवृक्ष’ की तरह बढ़ता संगठन

समारोह में संरक्षक ट्रस्टी डॉ. विनय कर्ण ने कहा कि मैथिली और मिथिलाक्षर का उत्थान तभी संभव है जब परिवारों में मातृभाषा के सहज उपयोग को सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बताया कि मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान अब मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश फोरम के अंतर्गत एक वृहत प्रकल्प का रूप ले चुका है और वटवृक्ष की तरह इसका विस्तार हो रहा है।
पं. कृष्ण कुमार झा ने अभियानियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि इस अभियान की सफलता इसकी टीम भावना पर निर्भर है और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ना होगा।

 Mithilakshar Literacy : समारोह में बड़ी संख्या में गणमान्य उपस्थित

कार्यक्रम में संरक्षक ट्रस्टी डॉ. विनय कर्ण, कुमार प्रमोद चन्द्र, अशोक कुमार लाल, जमशेदपुर से आए विक्रमादित्य सिंह, जनकपुर नेपाल से नेहा कर्ण, पटना से प्रदीप कुमार सहित कई समाजसेवी, साहित्यकार और मैथिली समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हुए।
समारोह का समापन सुविख्यात गीतकार प्रदीप जी की स्तुति *”जगदम्ब अहीं अवलम्ब हमर…”  के सामूहिक गायन के साथ हुआ।

 

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