भागलपुर में बेखौफ अपराधियों ने पूर्व पार्षद के बेटे पर किया जानलेवा हमला

भागलपुर में बेखौफ अपराधियों ने पूर्व पार्षद के बेटे पर किया जानलेवा हमला

भागलपुर : जिले में अपराध और नशे का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस का डर अपराधियों में लगभग खत्म होता दिख रहा है। मोजाहिदपुर और बबरगंज थाना क्षेत्र अब ऐसे इलाके बनते जा रहे हैं। जहां खुलेआम चाकूबाजी और हिंसक घटनाएं सामने आ रही हैं।

पूर्व पार्षद पुत्र पर जानलेवा हमला

मामला मोजाहिदपुर थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर पानी टंकी के पास का है, जहां 45 नंबर वार्ड के पूर्व पार्षद सदानंद चौरसिया के बेटे साहिल चौरसिया पर जानलेवा हमला किया गया। आरोप है कि बदमाशों ने साहिल पर चाकू से वार किया और इसके बाद लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा।आसपास के लोगों के जुटते ही हमलावर मौके से फरार हो गए। घायल साहिल को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, भाई को पड़ा दिल का दौरा

इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा,हमले की जानकारी मिलते ही सदानंद चौरसिया के भाई को दिल का दौरा पड़ा जिससे उनकी मौत हो गई, इस तरह एक ही परिवार को एक साथ दो बड़े सदमे झेलने पड़े।

महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी बना विवाद का कारण

बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की शुरुआत 31 दिसंबर की रात से हुई थी। नए साल के जश्न के दौरान साहिल अपने परिवार की महिलाओं के साथ शहर के एक रेस्टोरेंट गया था। इसी दौरान जरलाही इलाके के कुछ युवकों ने महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। विरोध करने पर दोनों पक्षों में कहासुनी और मारपीट हुई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामला शांत करवा दिया गया था, लेकिन विवाद यहीं नहीं थमा, बीते दिन देर शाम साहिल अपने भाई के साथ एक दुकान पर बैठा था। तभी चार-पांच युवक हथियार लेकर वहां पहुंचे और साहिल को खींचकर उसके साथ मारपीट की। इस मामले में जरलाही के दशरथ, नितेश समेत पांच लोगों के नाम सामने आए हैं, आरोप है कि ये सभी नशे के कारोबार से जुड़े हुए हैं।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है,पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।  गौर करने वाली बात यह है कि जिस रेस्टोरेंट में नए साल का कार्यक्रम हुआ था, उसका उद्घाटन खुद मोजाहिदपुर थाना के इंस्पेक्टर ने किया था। इसके बावजूद उसी रात छेड़खानी और मारपीट की घटनाएं सामने आना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि जब पुलिस की मौजूदगी में भी अपराध हो रहे हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?

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