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योजना एवं विकास विभाग की प्रेस वार्ता, में मंत्री ने दी जानकारी, विभागीय उपलब्धियों की दी जानकारी

योजना एवं विकास विभाग की प्रेस वार्ता, में मंत्री ने दी जानकारी, विभागीय उपलब्धियों की दी जानकारी

पटना :  मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत बिहार विधानमंडल के सदस्यों ने पिछले पांच से 6 वर्षों में 5 हजार 88 करोड़ रुपये की विभिन्न स्तर की कई योजनाओं की अनुशंसा की। इनमें 3 हजार 633 करोड़ रुपये खर्च कर 72 हजार 206 योजनाएं पूर्ण की गई है। जबकि, 17 हजार 621 योजनाओं का कार्य प्रगति पर है। 17वीं विधानसभा और बिहार विधान परिषद सदस्य की (वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक) के कार्यकाल के दौरान विभिन्न विकासात्मक योजनाओं की अनुशंसा की गई। वित्तीय वर्ष 2023-24 से प्रति विधानमंडल सदस्य की अनुशंसा के लिए अनुमान्यता राशि 3 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 4 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष कर दी गई है।

प्रेस वार्ता में मंत्री ने पेश किया उपलब्धियों का लेखाजोखा

यह जानकारी योजना एवं विकास विभाग के मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने दी। वे बुधवार को सूचना भवन के सभागार में आयोजित विभागीय प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान योजना एवं विकास विभाग के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों और इनकी उपलब्धियों का लेखाजोखा प्रस्तुत किया गया। मंत्री ने कहा कि राज्य के विकास से जुड़े आंकड़ों का संग्रह किया जा रहा है। सभी विभागों से इससे संबंधित जानकारी मांगी गई है। इसे संग्रहित करके रखा जाएगा और योजना विकास विभाग के साथ ही बिहार सांख्यिकी निदेशालय के ऑनलाइन पोर्टल पर सभी आंकड़े नियमित अपडेट किए जाएंगे। इस मौके पर विभागीय प्रधान सचिव मयंक बड़बडे, निदेशक रणजीत कुमार समेत अन्य मौजूद थे।

सांसदों ने विकासात्मक योजनाओं पर खर्च की 117 करोड़ 64 लाख रुपये

विभागी उपलब्धियों के तहत यह जानकारी प्रेषित की गई कि संसद सदस्यों की स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत 18वीं लोकसभा के सांसदों की अनुशंसा पर नवंबर 2025 तक 2456 स्वीकृत योजनाओं के मुकाबले 1108 योजना पूर्ण हो चुकी है, जिस पर 117 करोड़ 64 लाख रुपये का व्यय आया है। इसी तरह 17वीं लोकसभा के अंतर्गत सांसदों की अनुशंसा पर 13 हजार 93 योजनाओं में से 12 हजार 190 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। इस पर 621 करोड़ 90 लाख रुपये का खर्च किया गया। इसी तरह राज्यसभा के सांसदों की अनुशंसा पर वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक स्वीकृत 3 हजार 792 योजनाओं के मुकाबले 2 हजार 914 योजनाएं पूर्ण हैं, जिस पर 261 करोड़ 95 लाख रुपये का खर्च आया है। 868 ऐसी योजनाएं हैं, जिनका कार्य प्रगति पर है।

स्वयं सहायता भत्ता पर खर्च हुए 1 हजार 267 करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना के तहत 2 अक्टूबर 2016 से 31 दिसंबर 2025 तक 12वीं या समकक्ष परीक्षा पास कुल 8 लाख 76 हजार 473 आवेदकों को स्वयं सहायता भत्ता का भुगतान किया गया है। इस पर 1 हजार 267 करोड़ रुपये का खर्च आया है। इस योजना के तहत 1 अक्टूबर 2025 से स्नातक (कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय) पास युवक या युवतियों को भी इस योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत 31 दिसंबर 2025 तक 31 हजार 6 आवेदकों को स्वयं सहायता भत्ता का भुगतान किया गया है, जिस पर 3 करोड़ 10 लाख रुपये का खर्च आया है।

लोक वित्त समिति ने 2024-25 में की 586 योजनाओं की अनुशंसा

लोक वित्त समिति के समक्ष वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 586 योजनाओं की अनुशंसा की गई, जिसकी लागत राशि 1 लाख 38 हजार 811 करोड़ रुपये है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक कुल 357 योजनाओं की अनुशंसा की गई, जिसकी लागत राशि 1 लाख 68 हजार 870 करोड़ रुपये है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2023-24 में षष्ठम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा एवं राज्य योजना मद की राशि से दो हजार पंचायत सरकार भवनों के निर्माण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इनके अंतर्गत 1978 भवनों के निर्माण के लिए निविदा प्रकाशित की जा चुकी है, जिसमें 1960 का निपटारा किया जा चुका है। इसके अलावा ई-किसान भवन योजना के तहत 210 स्वीकृत योजनाओं में 186 भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है।

मंदिर और कब्रिस्तान की घेराबंदी का काम लगभग पूर्ण

राज्य में मंदिर और कब्रिस्तान की घेराबंदी का काम तेजी से चल रहा है। बिहार मंदिर चाहरदीवारी निर्माण योजना के तहत 654 योजनाओं में 538 योजनाओं का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। कब्रिस्तान घेराबंदी योजना के तहत स्वीकृत 4289 योजनाओं में 3893 योजनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है।

2024-25 में बिहार की विकास दर 13.09 प्रतिशत रही

वर्तमान मूल्य पर वित्तीय वर्ष 2024-25 का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में वार्षिक वृद्धि दर 13.09 प्रतिशत है। जबकि स्थिर मूल्य (2011-12 पर वार्षिक वृद्धि दर 8.64 प्रतिशत है। वर्तमान मूल्य पर वर्ष 2024-25 का प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद 76 हजार 490 रुपये था। जबकि, स्थिर मूल्य (2011-12) पर 40 हजार 973 रुपये है।

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