Patna : लिट्टी चोखा से सशक्तिकरण, क्या है दीदी की रसोई का राज

Patna : बिहार की महिलाएं शिक्षा, राजनीति, कृषि, बैंकिंग और पुलिसिंग के साथ दूसरे कई क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति तेजी से दर्ज कराई हैं. एक नई बानगी के तौर पर ग्रामीण विकास विभाग की ओर से राज्य भर में संचालित हो रही दीदी की रसोई के रूप में देखा जा सकता है. इस रसोई में समूह की महिलाएं न सिर्फ अपने स्वरोजगार के लिए नई जमीन तलाश कर रही हैं बल्कि यहां पर स्वास्थ्य वर्धक और पारंपरिक व्यंजनों की मिठास खाने की थाली में परोस रही हैं. खासकर मेडिकल कॉलेज, जिला और अनुमंडलीय अस्पतालों के साथ आवासीय विद्यालयों में दीदी के हाथों से तैयार नाश्ता और भोजन मरीज और बच्चों की सेहत संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

जीविका दीदी की रसोई बिहार सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल

जीविका दीदी की रसोई बिहार सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है. इसका उद्देश्य रोगियों,  छात्रों, आम नागरिकों को स्वच्छ, पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है. इसका संचालन राज्य भर में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के हाथों किया जा रहा है. आंकड़े बता रहे हैं कि राज्य में अभी तक 340 दीदी की रसोई संचालित की जा रही है. इसके सहारे करीब छह हजार से भी अधिक महिलाओं के हाथों को रोजगार मिल चुका है.

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ये मिलता है दीदी के रसोई में

दीदी की रसोई में चाय, कॉफी समेत अन्य सभी नाश्ते के साथ बिहार की पारंपरिक पहचान चूड़ा, घुघनी, लिट्टी-चोखा आदि व्यंजन तैयार किया जा रहा है. सरकारी विभागों में संचालित दीदी की रसोई में वहां की मांग के अनुसार भोजन और नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा है. जिला अस्पताल और आवासीय स्कूलों में तय मीन्यू के अनुसार ही नाश्ता और भोजन परोसा जा रहा है. समूह से जुड़ी महिलाओं के हाथों तैयार नाश्ता और भोजन की गुणवत्ता जहां बाजार से कई गुनी अधिक होती है वहीं कम कीमत पर ही लोग पारंपरिक और स्वादिष्ट व्यंजन की लुत्फ उठा रहे हैं.

इन स्थानों पर रसोई खोलने की तैयारी

17 जनवरी को बिहार पुलिस अकादमी राजगीर में दीदी की रसोई का शुभारंभ होगा. यहां एक साथ 1600 रंगरूटों (नवनियुक्त पुलिस कर्मी) के लिए भोजन और नाश्ते की व्यवस्था दीदी की रसोई में की जाएगी. इसके लिए इस स्थान पर 150 जीविका दीदियां अलग-अलग शिफ्ट में अपनी सेवा देंगी. इसी के साथ सरकार की मंशा के अनुसार राज्य के सभी जिला अस्पताल और कलेक्ट्रेट में दीदी की रसोई संचालित करने की योजना है. दीदी की रसोई में बनने वाले व्यंजन की निगरानी के  लिए विभाग ने अन्नपूर्णा जीविका उत्पादक कंपनी को जिम्मेदारी सौंप रखी है.

 राज्यभर में इन स्थानों पर हो रहा रसोई का संचालन

  • सभी मेडिकल कॉलेज
  • सभी अनुंडलीय अस्पताल
  • सभी अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति आवासीय स्कूल
  • पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग आवासीय स्कूल
  • सभी अल्पसंख्यक कल्याण आवासीय स्कूल
  • बिहार इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड अलाइज साइंसेज (बीआईएमएचएएस), आरा
  • सरदार पटेल भवन, पुलिस मुख्यालय पटना
  • पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (बीएसएपी, पुलिस लाइन)
  • जिला मुख्यालय स्तर पर बस डिपो
  • प्रखंड मुख्यालय
  • अनुमंडल कार्यालय
  • समाहरणालय परिसर
  • प्रखंड स्तरीय कैंटीन
  • वृद्धाश्रम
  • विभिन्न शासकीय एवं सार्वजनिक संस्थान

 रसोई खुलने का समय

दीदी की रसोई का संचालन संबंधित संस्थान के कार्य-समय एवं आवश्यकता के अनुरूप किया जा रहा है. मुख्य रूप से अस्पताल परिसर सुबह करीब 8 बजे नाश्ता,  दोपहर 1 बजे और रात 8 बजे भोजन की सुविधा रहती है. रसोई के सुचारु एवं समयबद्ध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए दीदी अपने निर्धारित सेवा-समय से पूर्व  सामान्य रूप से सुबह 6 बजे संस्थान में उपस्थित हो जाती हैं. यहां रसोई की साफ-सफाई के साथ दिन भर  रसोई संबंधी गतिविधियां चलती रहती हैं.

रसोई की खासियत

  • सस्ता पौष्टिक भोजन
  • पारंपरिक व्यंजन
  • महिला सशक्तिकरण को मजबूती
  • भोजन में घर जैसी आत्मीयता और प्यार का मिश्रण

ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने ये कहा

ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा अस्पताल, स्कूल, सरकारी संस्थान और दूसरे सार्वजनिक स्थलों पर दीदी की रसोई लोगों को सिर्फ भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है. यह ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी और सशक्त बनाने का एक सशक्त माध्यम है. राज्य में करीब 340 समूह के सहारे करीब छह हजार से भी अधिक महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है.

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