भारतीय स्टार्टअप एसोसिएशन ने आज (15 जनवरी) बैठक की. बैठक में विभिन्न एवं विविध क्षेत्रों से जुड़े स्टार्टअप ने भाग लिया. इस बैठक में विभिन्न प्रेस एजेंसियों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, जहां झारखंड स्टार्टअप नीति, उसके क्रियान्वयन की स्थिति (समीक्षा) तथा स्टार्टअप्स को सरकार द्वारा दिए जा रहे सहयोग पर विस्तृत चर्चा की गई.
बैठक में 30 स्टार्टअप्स की रही भागीदारी
बैठक में लगभग 30 स्टार्टअप्स की भागीदारी रही, जो मिलिट्री-ग्रेड ड्रोन तकनीक, वैज्ञानिक जल संरक्षण एवं संवर्धन, सिंचाई एवं मृदा अपरदन नियंत्रण, पर्यावरणीय स्थिरता, हरित ऊर्जा, अपशिष्ट एवं अवशेष उपयोग, स्वदेशी बीज (देसी बीज) संरक्षण, मखाना जैसे सुपरफूड्स, पुनः उपयोग योग्य पर्यावरण संरक्षण उत्पाद, गेट ऑटोमेशन, कोडिंग एवं तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, परिवहन, विभिन्न ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफॉर्म, ढोकरा कला, मिट्टी के घरों की वास्तुकला, तथा अन्य पारंपरिक एवं आधुनिक नवाचार आधारित उद्यमों से संबंधित थे.
Koderma News: अफीम की अवैध खेती के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, तीन एकड़ में लगी फसल को किया नष्ट
ये है बैठक का उद्देश्य
इस बैठक का उद्देश्य झारखंड स्टार्टअप नीति की जमीनी हकीकत का गंभीर मूल्यांकन, नीति के उद्देश्य और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच की खाइयों की पहचान, तथा आधिकारिक मान्यता प्राप्त होने के बावजूद स्टार्टअप्स को मिल रहे संस्थागत, वित्तीय एवं इनक्यूबेशन समर्थन की कमी पर चर्चा करना था.
झारखंड का स्टार्टअप इकोसिस्टम अत्यंत कमजोर: प्रतिभागी
चर्चा के दौरान सरकार द्वारा अपनी ही स्टार्टअप नीतियों के क्रियान्वयन में निरंतर उदासीनता पर गहरी चिंता व्यक्त की गई, विशेष रूप से झारखंड स्टार्टअप नीति के अंतर्गत चयनित 107 स्टार्टअप्स को अनुदान एवं लाभ जारी न किए जाने को लेकर सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में कहा कि झारखंड का स्टार्टअप इकोसिस्टम अत्यंत कमजोर स्थिति में है, जहां न तो प्रभावी प्रचार है, न वित्तीय सहायता, न इनक्यूबेशन केंद्र, न मेंटरशिप ढांचा और न ही बाजार से जोड़ने की कोई ठोस व्यवस्था.
‘इनोवेटिव झारखंड फंड’ की कार्यप्रणाली पर भी हुई गंभीर चर्चा
बैठक में राज्य योजना कार्यालय के अंतर्गत संचालित ‘इनोवेटिव झारखंड फंड’ की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर चर्चा हुई. इस दौरान यह चिंता व्यक्त की गई कि मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को इस फंड से बाहर रखा जा रहा है, जबकि गैर-स्टार्टअप संस्थाओं तथा अधिकारियों से जुड़े व्यक्तियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है, जिससे चयनित 107 स्टार्टअप्स तक को इस फंड में स्थान नहीं मिल पा रहा है. पारदर्शिता एवं जवाबदेही की यह कमी राज्य में नवाचार और उद्यमिता को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा रही है.
बैठक में ये रहे मौजूद
- रथिन भद्रा – राष्ट्रीय अध्यक्ष
- एफसीएस रोहित प्रीत – राष्ट्रीय महासचिव
- अतुल शौर्य – राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
- सतीश कुमार – राष्ट्रीय संयुक्त सचिव
- गोविंद ठाकुर – राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य
- राकेश राज – कार्यकारिणी सदस्य
- संदीप रंजन – निवेशक एवं मेंटर
बैठक के दौरान इन मुद्दों पर की गई चर्चा
प्रेस एजेंसियों की उपस्थिति ने बैठक की पारदर्शिता सुनिश्चित की तथा नीति में जवाबदेही, निष्पक्ष फंड आवंटन और त्वरित सुधारात्मक कदमों की तत्काल आवश्यकता को सार्वजनिक मंच पर उजागर किया. भारतीय स्टार्टअप एसोसिएशन ने पुनः मांग की कि स्टार्टअप नीतियों का समयबद्ध क्रियान्वयन किया जाए, लंबित अनुदान तुरंत जारी की जाए, इनक्यूबेशन एवं मेंटरशिप इकोसिस्टम को सक्रिय किया जाए, तथा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को राज्य नवाचार फंड तक समावेशी पहुंच प्रदान की जाए. यदि शीघ्र और ईमानदार हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो झारखंड अपने नवाचारकर्ताओं, उद्यमियों और रोजगार सृजन की क्षमता को अन्य राज्यों की ओर खो देगा, जिससे राज्य का आर्थिक भविष्य और अधिक कमजोर हो जाएगा.
Highlights

