नई दिल्ली : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई की। विष्णु शंकर जैन ने याचिकाकर्ता की ओर से दलीलें देनी शुरू की। जैन ने कहा कि इससे समाज में विभेद पैदा हो रहा है। उन्होंने नियम के सेक्शन 3C को चुनौती दी।
विष्णु जैन ने कहा कि इस अधिसूचना की धारा 3(c) में SC, ST, OBC के खिलाफ जाति आधारित भेदभाव के रूप में परिभाषित किया गया है। इसमें जनरल कैटेगरी के सदस्यों को पूरी तरह से बाहर रखा गया है। ये 3C अनुच्छेद 14 पर असर डालती है और E में दी गई परिभाषा पूरी तरह से भेदभाव पूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर लगाई रोक, केंद्र को जारी किया नोटिस
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि नए नियम अस्पष्ट हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
याचिकाकर्ता के वकील ने भेदभाव की परिभाषा पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान विष्णु शंकर जैन ने कहा कि हम इसलिए यूजीसी के रेगुलेशन के सेक्शन 3C को चैलेंज कर रहे हैं क्योंकि इसमें जातिगत भेदभाव की बात की गई है। रेगुलेशन में भेदभाव की जो परिभाषा दी गई है वो पूरी तरह से सही नहीं है। यह संविधान की समानता की भावना के विपरीत है। संविधान के मुताबिक, यह भेदभाव देश के सभी नागरिकों से जुड़ा है. लेकिन यूजीसी का कानून सिर्फ विशेष वर्ग के प्रति भेदभाव की बात करता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी पहले जो आदेश दिया है, ये उस भावना के भी खिलाफ हैं। इससे समाज में वैमनस्य बढ़ेगा। ये संविधान में दिए गए समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।
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अंशु झा की रिपोर्ट
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