Liquor License Renewal : झारखंड में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1343 में से 1302 खुदरा शराब दुकानों ने लाइसेंस नवीकरण का आवेदन दिया। 41 दुकानों ने आवेदन नहीं किया।
Liquor License Renewal रांची: झारखंड में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा शराब दुकानों के संचालन को लेकर लाइसेंस नवीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। राज्य की कुल 1343 शराब दुकानों में से 1302 दुकानों के संचालकों ने नवीकरण के लिए आवेदन जमा कर दिया है। इस तरह करीब 97 प्रतिशत दुकानों ने समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी कर ली है।
राशि जमा करने की अंतिम तिथि सात फरवरी निर्धारित की गई थी। निर्धारित समय सीमा के भीतर बड़ी संख्या में संचालकों ने आवेदन और शुल्क जमा कराया।
Liquor License Renewal : 41 दुकानों ने नहीं किया आवेदन
राज्य की 41 शराब दुकानों के लाइसेंस नवीकरण के लिए आवेदन जमा नहीं हुआ है। ऐसे में इन दुकानों के लिए विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, इन दुकानों के संचालन को लेकर आगे नई प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
Key Highlights
1343 में से 1302 दुकानों ने लाइसेंस नवीकरण के लिए आवेदन किया
करीब 97 प्रतिशत दुकानों ने समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी की
41 दुकानों ने नवीकरण के लिए आवेदन जमा नहीं किया
नगर क्षेत्र में दो लाख और ग्रामीण क्षेत्र में एक लाख रुपये शुल्क तय
अगले वित्तीय वर्ष से 10 प्रतिशत राजस्व बढ़ोतरी का प्रस्ताव
Liquor License Renewal :नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क
सरकार ने नगर निगम क्षेत्र की शराब दुकानों के लिए दो लाख रुपये तथा ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानों के लिए एक लाख रुपये नवीकरण शुल्क निर्धारित किया था। आगामी वित्तीय वर्ष से दुकानों से प्राप्त राजस्व में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी रखा गया है।
राजस्व बढ़ोतरी के प्रस्ताव को लेकर संचालकों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखी जा रही है। कई संचालकों का कहना है कि पहले से ही लागत और कर का दबाव अधिक है।
Liquor License Renewal :संचालकों ने जताई राजस्व बोझ की चिंता
झारखंड खुदरा शराब दुकान संचालक संघ के प्रदेश महासचिव सुबोध कुमार जायसवाल ने कहा कि खुदरा शराब दुकान संचालकों पर राजस्व का काफी बोझ है। इसके बावजूद आगामी महीनों में बिक्री बढ़ने की उम्मीद को देखते हुए बड़ी संख्या में संचालकों ने लाइसेंस नवीकरण के लिए आवेदन किया है।
उन्होंने कहा कि यदि होली के दौरान अपेक्षित बिक्री नहीं होती है तो कुछ दुकानदार मार्जिन मनी जमा करने से पीछे हट सकते हैं। ऐसी स्थिति में सरेंडर दुकानों की संख्या बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।
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