Economic Survey 2026: Service Sector बना अर्थव्यवस्था का नया Growth Engine, उद्योग पीछे

Economic Survey 2026: झारखंड इकोनॉमिक सर्वे 2026 में सर्विस सेक्टर 45.56 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा क्षेत्र बना। GSDP ग्रोथ 5.96 फीसदी अनुमानित।


Economic Survey 2026 रांची: रांची में बजट सत्र के चौथे दिन पेश आर्थिक सर्वेक्षण ने झारखंड की अर्थव्यवस्था की बदलती तस्वीर साफ कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में सर्विस सेक्टर ने उद्योग को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़े आर्थिक क्षेत्र का दर्जा हासिल कर लिया है। यह बदलाव राज्य की विकास संरचना में बड़े परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है।

Economic Survey 2026: सर्विस सेक्टर बना सबसे बड़ा आर्थिक आधार

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 2011-12 में सकल राज्य मूल्य संवर्धन यानी GSVA में सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी 38.54 फीसदी थी, जो 2024-25 में बढ़कर 45.56 फीसदी हो गई है।

2024-25 में GSVA ग्रोथ में सर्विस सेक्टर का योगदान 53.2 फीसदी रहा, जबकि उद्योग का योगदान 23 फीसदी और कृषि का 16 फीसदी रहा।

अनुमान है कि 2025-26 में सर्विस सेक्टर का GSVA 1,37,730 करोड़ रुपये और 2026-27 में 1,48,479 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसकी हिस्सेदारी 2025-26 में 46.65 फीसदी और 2026-27 में 47.17 फीसदी तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

वित्तीय सेवाओं में उल्लेखनीय तेजी देखी गई है, जहां हाल के वर्षों में 11 से 19 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई। 2025-26 में वित्तीय सेवाओं का GSVA 10,837 करोड़ रुपये और 2026-27 में 11,893 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

Economic Survey 2026: प्रति व्यक्ति आय और GSDP ग्रोथ का अनुमान

सर्वे में बताया गया है कि झारखंड की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के करीब बनी हुई है। 2016-17 से यह राष्ट्रीय औसत के लगभग 60 फीसदी स्तर पर स्थिर है।

स्थिर कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय 2025-26 में 71,994 रुपये और 2026-27 में 75,670 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह क्रमशः 5.25 फीसदी और 5.18 फीसदी की वृद्धि को दर्शाता है।

सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी GSDP की वृद्धि दर 2026-27 में 5.96 फीसदी रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के अनुमानित 6.17 फीसदी से थोड़ा कम है। हालांकि 2024-25 में राज्य ने 7.02 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की थी, जो राष्ट्रीय औसत 6.5 फीसदी से अधिक रही।


Key Highlights

  1. सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी 45.56 फीसदी तक पहुंची

  2. 2026-27 में GSDP ग्रोथ 5.96 फीसदी अनुमानित

  3. प्रति व्यक्ति आय 75,670 रुपये तक पहुंचने की संभावना

  4. बहुआयामी गरीबी में 13.29 फीसदी अंकों की कमी

  5. राजकोषीय घाटा 3 फीसदी की सीमा के भीतर


Economic Survey 2026: गरीबी में कमी और सरकारी योजनाओं का असर

आर्थिक सर्वे के अनुसार राज्य में बहुआयामी गरीबी 2015-16 में 42.10 फीसदी थी, जो 2019-21 में घटकर 28.81 फीसदी रह गई। पांच वर्षों में 13.29 फीसदी अंकों की गिरावट राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन दर्शाती है।

इस सुधार का श्रेय आर्थिक विकास के साथ लक्षित योजनाओं को दिया गया है, जिनमें सौभाग्य योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन शामिल हैं। इन योजनाओं से बिजली, शौचालय, रसोई गैस और पेयजल जैसी सुविधाओं तक पहुंच में वृद्धि हुई है।

Economic Survey 2026: बजट आकार में वृद्धि और राजकोषीय स्थिति

झारखंड का बजट 2001-02 में 6,007 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1,16,892 करोड़ रुपये हो गया है। 2025-26 के लिए 1,45,400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

योजना मद पर खर्च 2018-19 में 54.7 फीसदी से बढ़कर 2024-25 में 60.7 फीसदी हो गया है, जबकि स्थापना व्यय घटकर 39.3 फीसदी रह गया है। पूंजीगत व्यय 2023-24 में कुल खर्च का 29 फीसदी रहा, जो संदर्भ अवधि का उच्चतम स्तर था।

सर्वे के अनुसार 2020-21 के कोविड काल को छोड़कर राज्य का राजकोषीय घाटा FRBM Act की 3 फीसदी सीमा के भीतर रहा है। 2023-24 में यह 1.37 फीसदी और 2024-25 में 2.81 फीसदी दर्ज किया गया, जो तय सीमा के अंदर है।

अब 24 फरवरी को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर विधानसभा में वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट पेश करेंगे। आर्थिक सर्वे के संकेत बताते हैं कि झारखंड की अर्थव्यवस्था पारंपरिक खनन आधारित ढांचे से आगे बढ़कर सर्विस सेक्टर आधारित विकास मॉडल की ओर कदम बढ़ा रही है।

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