रांची में डालसा के सामने दो मार्मिक मामले आए। 15 वर्षीय गर्भवती नाबालिग और 9 माह की गर्भवती महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ मिलीं, दोनों को इलाज और संरक्षण दिया गया।
Ranchi Human Story रांची: राजधानी रांची में इंसानियत को झकझोर देने वाली दो मार्मिक घटनाएं सामने आई हैं। मंगलवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार रांची के समक्ष दो अलग-अलग मामले पहुंचे, जिनमें एक 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची आठ माह की गर्भवती है, जबकि दूसरी 35 वर्षीय महिला नौ माह की गर्भवती है। दोनों ही महिलाओं की मानसिक स्थिति ठीक नहीं बतायी जा रही है।
इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए डालसा सचिव ने तुरंत दो अलग-अलग टीमों का गठन किया और दोनों पीड़िताओं को चिकित्सा सहायता व संरक्षण उपलब्ध कराने की व्यवस्था करायी।
Ranchi Human Story:आठ माह की गर्भवती नाबालिग कुछ भी बताने में असमर्थ
पहले मामले में 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची आठ माह की गर्भवती है। उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह अपने बारे में कोई जानकारी नहीं दे पा रही है। बच्ची को इलाज के लिए रांची स्थित रिनपास ले जाया गया, जहां फिलहाल उसके रहने की व्यवस्था भी की गई है।
बच्ची की स्थिति को देखते हुए बाल विकास परियोजना पदाधिकारी वेद प्रकाश तिवारी से बातचीत और पत्राचार कर उसे धनबाद स्थित एमओसी में रखने का निर्देश दिया गया है। रांची में इस तरह की नाबालिग बच्चियों के लिए उपयुक्त संस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण यह निर्णय लिया गया है।
Key Highlights
रांची में डालसा के सामने दो मार्मिक मामले आए
15 वर्षीय नाबालिग आठ माह की गर्भवती, मानसिक स्थिति ठीक नहीं
रांची रेलवे स्टेशन के पास अचेत मिली नौ माह की गर्भवती महिला
दोनों पीड़िताओं को रिनपास में इलाज और संरक्षण उपलब्ध कराया गया
नाबालिग को धनबाद स्थित एमओसी में रखने की प्रक्रिया शुरू
Ranchi Human Story:रेलवे स्टेशन के पास अचेत मिली नौ माह की गर्भवती महिला
दूसरे मामले में रांची रेलवे स्टेशन के पास से एक 35 वर्षीय महिला अचेत अवस्था में मिली, जो नौ माह की गर्भवती है। बताया जा रहा है कि महिला खुद को ओडिशा की रहने वाली बता रही है, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति भी सामान्य नहीं है।
डालसा की पहल पर सबसे पहले महिला की प्रारंभिक जांच रिम्स रांची में करायी गयी। इसके बाद रिनपास के निदेशक से समन्वय कर उसे इलाज के लिए रिनपास में भर्ती कराया गया।
डालसा की इस पहल से दोनों पीड़िताओं को समय पर चिकित्सा सहायता और सुरक्षित संरक्षण मिल सका। अब संबंधित एजेंसियां इन दोनों मामलों की पृष्ठभूमि और पहचान से जुड़ी जानकारी जुटाने में लगी हैं।
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