Tribal Land Transfer पर Audit की तैयारी, महालेखाकार ने मांगे दस्तावेज, CNT SPT Act उल्लंघन पर बढ़ी हलचल

झारखंड में आदिवासी जमीन के हस्तांतरण पर महालेखाकार ने ऑडिट की इच्छा जतायी। सरकार से दस्तावेज मांगे गए, CNT SPT Act उल्लंघन पर बढ़ी हलचल।


Tribal Land Transfer रांची: झारखंड में आदिवासी जमीन के हस्तांतरण को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। महालेखाकार झारखंड ने इस मामले में ऑडिट करने की इच्छा जताते हुए राज्य सरकार को पत्र भेजा है। महालेखाकार की ओर से इस विषय से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।

महालेखाकार का कहना है कि आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री राजस्व से जुड़ा मामला है, इसलिए इसका ऑडिट किया जा सकता है। अब इस पत्र के आलोक में राज्य सरकार को यह निर्णय लेना है कि दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं या नहीं।

Tribal Land Transfer : CNT SPT Act उल्लंघन को लेकर पहले भी उठते रहे सवाल

राज्य में लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि CNT SPT एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन कर आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री की जा रही है। इस मुद्दे को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस होती रही है।

महालेखाकार की ओर से पत्र भेजे जाने के बाद राज्य सरकार के स्तर पर हलचल तेज हो गई है। सरकार ने इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए विधि विभाग से मंतव्य मांगा है। विधि विभाग की राय के आधार पर ही सरकार तय करेगी कि महालेखाकार को दस्तावेज सौंपे जाएं या नहीं।


Key Highlights:

झारखंड में आदिवासी जमीन हस्तांतरण पर महालेखाकार करना चाहते हैं ऑडिट

• राज्य सरकार से इस मामले से जुड़े दस्तावेज मांगे गए

• CNT SPT Act के उल्लंघन को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

• सरकार ने विधि विभाग से मांगा है मंतव्य

• विधानसभा और प्रशासनिक स्तर पर पहले भी बन चुकी हैं जांच कमेटियां


Tribal Land Transfer :विधानसभा कमेटी भी कर चुकी है जांच

झारखंड में आदिवासी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री का मुद्दा पिछले कई वर्षों से उठता रहा है। इस संबंध में विधानसभा की एक कमेटी भी गठित की गई थी। पिछली सरकार के दौरान झामुमो के वरिष्ठ विधायक स्टीफन मरांडी की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने इस मामले की जांच शुरू की थी।

कमेटी ने आम लोगों से आवेदन भी मांगे थे और हजारों शिकायतें प्राप्त हुई थीं, लेकिन यह जांच पूरी नहीं हो पाई। इससे पहले रघुवर दास सरकार के समय पूर्व विकास आयुक्त देवाशीष गुप्ता की अध्यक्षता में भी एक जांच कमेटी गठित की गई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी।

Tribal Land Transfer : 2015 में बंद कर दिया गया था एसएआर कोर्ट

राज्य सरकार ने दिसंबर 2015 में स्पेशल एरिया रेगुलेशन एसएआर कोर्ट को बंद कर दिया था। यह कोर्ट शेड्यूल एरिया रेगुलेशन एक्ट के तहत काम करता था और इसमें आदिवासी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों की सुनवाई होती थी।

इस कोर्ट को जमीन वापसी या क्षतिपूर्ति से जुड़े आदेश देने का अधिकार था। उस समय सरकार का तर्क था कि एसएआर कोर्ट की आड़ में जमीन की खरीद-बिक्री हो रही है, इसलिए इसे बंद किया गया। हालांकि इसके बाद भी आदिवासी जमीन के अवैध हस्तांतरण की शिकायतें पूरी तरह बंद नहीं हो सकीं।


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