सदन में बिफरे Jairam, आदिवासी जमीन,सूड़ी-कुड़मी समाज, केवट समुदाय को लेकर सरकार को घेरते हुए की कर दी ये मांग

Jharkhand: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान Jairam महतो खूब बिफरे,  आदिवासी जमीन,सूड़ी-कुड़मी समाज, केवट समुदाय को लेकर सरकार को घेरा है। जयराम महतो ने सदन में कहा- हामर खेत हामर दाना पैट काटी नहीं देवो खजाना। 1757 में बैटल ऑफ प्लासी 1764 में बैटल ऑफ बक्सर विजय के बाद जब अंग्रेज झारखंड की भूमि में प्रवेश कर रहे थे। तब 1769 में रघुनाथ महतो के नेतृत्व में चुहाड़ आंदोलन हुआ और अंग्रेजों के दांत खट्टे किए। उसके बाद निरंतर बाबा तिलका मांझी तिलंगा खड़िया सिद्धो कानू नीलाम्बर पीतांबर और भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में लगभग सैकड़ों लड़ाई इस भूभाग में लड़ी गई अंग्रेजों के खिलाफ और उस लड़ाई का मूल कारण था इस राज्य की जमीनों को बचाने का अंग्रेजों ने जब इन लड़ाईयों से अंग्रेजों ने एक टीम बैठाकर जांच करने का प्रयास किया कि इसका मूल कारण क्या है?

1837 में कोल्हान प्रमंडल के लिए विलकिंसन कानून बनाया

तो एक्सपर्ट की टीम ने उन्हें बताया कि झारखंड के लोग जान से ज्यादा जमीन को मानते हैं और मां से ज्यादा माटी को मानते हैं। ये किसी भी हाल में अपनी जमीन को लेने नहीं देंगे। फिर अंग्रेजों ने अंतत हम पर एक नियम 1837 में विलकिंसन कानून बनाया कोल्हान प्रमंडल के लिए। 1908 में सीएनटी कानून बनाया। छोटा नागपुर के पठार के लिए और 1949 में एसपीटी के कानून बनाए गए संथाल प्रगना के लिए ताकि झारखंड के लोगों की जमीनों को बचाया जा सके। लेकिन अध्यक्ष महोदय आज गोरे अंग्रेज तो हमारे बीच से जा चुके हैं। आज ईस्ट इंडिया कंपनी हमारे बीच से तो जा चुकी है लेकिन आज भारी पैमाने पर एनटीपीसी हो, बीसीसीएल हो, सीसीएल हो, ईसीएल हो, टाटा ग्रुप्स हो, अडानी ग्रुप्स हो, रूमटा ग्रुप्स हो आज भी मनमाने तरीके से हमारे लोगों की, हमारे रैतों की जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है। अध्यक्ष महोदय, कितना ताज्जुब की बात है कि अंग्रेजों को हमारी जमीन की फिक्र थी।

अंग्रेज चाहते थे कि हम हमारे राज्य के भोलेभाले आदिवासियों की जमीनों का कोई अधिग्रहण ना करें..

अंग्रेज चाहते थे कि हम हमारे राज्य के भोलेभाले आदिवासियों की जमीनों का कोई अधिग्रहण ना करें। लेकिन बड़ा दुर्भाग्य की बात है कि अबुआ सरकार जो जल जमीन जंगल की सरकार होने का दावा करती है उसे हमारी जमीन की तनिक भी परवाह नहीं है। महोदय मैं आपको कुछ आंकड़े बताना चाहूंगा। महोदय जमीन का बाजार मूल्य तय करने के लिए निकटवर्ती सेल डीड के आधार पर बाजार दर बाजार दर निर्धारित किया जाता है। जैसा कि नए भूमि अधिग्रह कानून 2013 के सेक्शन 26 में स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है। लेकिन वास्तविकता यह है कि कई जगहों पर अभी भी जमीन का मूल्य उपज कृषि उत्पादन के आधार पर तय किया जा रहा है जो पूरी तरह अन्याय पूर्ण है और किसानों के अधिकारों का हनन है।

देवघर एयरपोर्ट की भूमि अधिग्रह प्रक्रिया में देखने को मिला…

Jairam महतो ने आगे कहा महोदय, इसका सबसे बड़ा उदाहरण देवघर एयरपोर्ट की भूमि अधिग्रह प्रक्रिया में देखने को मिला। वहां रेतों की जमीन का मुआवजा पुराने सिस्टम के तहत उपज आधारित फार्मूले से तय किया गया। जबकि कानून स्पष्ट रूप से बाजार दर के आधार पर मुआवजा तय करने की बात करता है। महोदय, इस अन्याय के खिलाफ एक रयत अजय झा ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और लगभग सात वर्षों तक न्याय के लिए लड़ाई लड़ी।

सदन में उठा स्थानीयता का मुद्दा

महोदय अगर स्थानीयता नहीं होती तो मान के चलिए पुलिस की बहाली निकलती और पूरा इंडिया एक होता तो पूरे हिंदुस्तान में पंजाब के लोगों का ज्यादा सिलेक्शन होता पुलिस में। और अगर पंजाब के लोग अगर अरुणाचल प्रदेश चले भी जाते पुलिस की बहाली में तो क्या विधि व्यवस्था का संचालन हो पाता। ठीक उसी प्रकार अगर पूरे राज्य में शिक्षकों की बहाली होती और स्थानीय स्थानीयता का मानक नहीं रहता तो केरल के लोग पूरे पूरे देश में जाकर टीचर बनते और यदि कोई केरल का शख्स नागालैंड में जाके टीचर बन भी जाए तो क्या बच्चों को पढ़ा पाएगा? इसलिए नागरिकता तय करना देश का काम होता है। लेकिन स्थानीयता तय करना ये राज्य का काम होता है। और मैं राज्य सरकार से मांग करूंगा कि स्थान नीति पर विचार करें। एक बात यह भी आती है कि बहुत सारे लोग इस भूभाग में रह चुके हैं। तो मैं चाहूंगा एक श्वेत पत्र जारी किया जाए। जो लोग कहते हैं कि झारखंड में हम रह चुके हैं, बस चुके हैं और अपना मूल भूमि से चाहे वो बिहार हो, बंगाल, उड़ीसा हो, छत्तीसगढ़ हो, उत्तर प्रदेश हो उससे नाता टूट चुका है। तो एक मोह एक श्वेत पत्र जारी किया जाए। माननीय मुख्यमंत्री अभी असम के दौरे पर गए थे। असम में व्यवस्था टी ट्राइब की है। एक मिनट लेंगे अध्यक्ष महोदय। असम में व्यवस्था एक टी ट्राइब की है। तो सरकार को सोचना चाहिए, विचार करना चाहिए और स्थान नीति की तरफ सरकार का कदम बढ़ना चाहिए। अध्यक्ष महोदय अंत में ज्यादा समय नहीं लेंगे। 50 वर्ष से अधिक महिला शिक्षकों को अभी अपने पड़ोसी जिला होम डिस्ट्रिक्ट में स्थानांतरण का लाभ और मौका दिया जा रहा है। मैं चाहता हूं उसी तर्ज पर पुरुष जिनकी उम्र 50 साल से ज्यादा हो चुकी है उन्हें अपने पड़ोसी जिला होम डिस्ट्रिक्ट में स्थानांतरण का लाभ मिले। साथ ही अध्यक्ष महोदय एक सूचना है पेंशन निदेशालय में निदेशक के पद पर कोई भी पदाधिकारी पदस्थापित नहीं रहने के कारण राज्य सरकार के सेवानिवृत्त पदाधिकारी कर्मचारी का काम बाधित हो रहा है। निदेशालय में शीघ्र निदेशक को पदस्थापित करने की सूचना देता हूं।

 

 

 

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