झारखंड हाईकोर्ट ने आरआरडीए के अधिकार को लेकर एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाई, ग्रामीण भवन नक्शा पास करने के मामले में जून में होगी सुनवाई।
Jharkhand High Court Order Update रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने ग्रामीण क्षेत्रों में भवनों का नक्शा पास करने के अधिकार को लेकर रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले में एकल पीठ के पूर्व आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है और अपील याचिकाओं को अंतिम सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।
Jharkhand High Court Order Update:खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर लगाई रोक
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद कोर्ट ने एकल पीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें कहा गया था कि पंचायत राज अधिनियम के तहत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में आरआरडीए को भवन नक्शा पास करने का अधिकार नहीं है।
खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिया कि प्रतिवादियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक या पीड़क कार्रवाई करने से पहले अदालत की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
Key Highlights:
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर लगाई रोक
आरआरडीए के अधिकार को लेकर मामला अभी विचाराधीन
बिना कोर्ट अनुमति किसी पर कार्रवाई नहीं होगी
जून में होगी अंतिम सुनवाई
ग्रामीण क्षेत्रों में भवन नक्शा पास करने को लेकर विवाद जारी
Jharkhand High Court Order Update:जून में होगी अंतिम सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए जून माह की तिथि तय की है। इससे पहले आरआरडीए की ओर से दायर अपील याचिकाओं को स्वीकार कर लिया गया है।
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन ने आरआरडीए की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि प्राधिकार को अपने क्षेत्राधिकार में भवनों का नक्शा पास करने और आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार है। वहीं प्रतिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने इसका विरोध किया।
Jharkhand High Court Order Update:क्या था एकल पीठ का आदेश
एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि झारखंड पंचायत राज अधिनियम-2001 लागू होने के बाद पंचायत क्षेत्रों में आरआरडीए को भवन नक्शा मंजूरी देने का अधिकार नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया था कि ऐसे क्षेत्रों में बिना आरआरडीए की अनुमति के बने भवनों को अवैध नहीं माना जा सकता।
एकल पीठ ने आरआरडीए के उपाध्यक्ष द्वारा पारित उस आदेश को भी अवैध करार दिया था, जिसमें याचिकाकर्ता की संपत्ति को सील करने और ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने संपत्ति की सीलिंग हटाने और संरचना को खोलने का निर्देश भी दिया था।


