नई दिल्ली : भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 के मंच पर ‘फोकस स्टेट’ के रूप में बिहार ने जिस आत्मविश्वास के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य अब ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का एक उभरता हुआ और भरोसेमंद केंद्र बन चुका है। यशोभूमि, नई दिल्ली में चल रहे इस वैश्विक आयोजन के दौरान बिहार ने न केवल अपनी उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, बल्कि वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं के साथ मजबूत संवाद भी स्थापित किया।
पैवेलियन से संवाद तक : निवेश की जमीन पर दिखा भरोसा
समिट में बिहार पैवेलियन लगातार चर्चा का केंद्र बना रहा। बड़ी संख्या में आगंतुकों और प्रतिनिधियों ने स्टॉल पर पहुंचकर राज्य की ऊर्जा पहलों को करीब से समझा। बीएसपीएचसीएल की कोर टीम ने मौके पर मौजूद रहकर निवेशकों और आगंतुकों के साथ विस्तृत बातचीत की और संभावित सहयोग के रास्तों को टटोला। इस दौरान कई प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बैठकें हुईं, जिनमें भविष्य की परियोजनाओं पर गंभीर चर्चा हुई।

समिट के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में गहरी रुचि देखने को मिली
समिट के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में गहरी रुचि देखने को मिली। विभिन्न देशों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बिहार की नीतियों और प्रगति को करीब से समझा। इन संवादों ने यह संकेत दिया कि राज्य अब वैश्विक ऊर्जा निवेश मानचित्र पर तेजी से अपनी जगह बना रहा है और आने वाले समय में बड़े निवेश आकर्षित करने की क्षमता रखता है।
बदलाव की बुनियाद : बिजली क्षेत्र में दो दशकों की यात्रा
बिहार की इस मजबूत छवि के पीछे पिछले 20 वर्षों में हुआ व्यापक परिवर्तन है। वर्ष 2005 में जहां राज्य को 700 मेगावाट से भी कम बिजली उपलब्ध होती थी, वहीं आज 8,700 मेगावाट से अधिक की मांग पूरी की जा रही है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लगभग 24 घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित हो चुकी है और 2.2 करोड़ से अधिक उपभोक्ता नेटवर्क से जुड़ चुके हैं। बिजली अब राज्य के हर गांव और घर तक पहुंच चुकी है, जिससे विकास की नई संभावनाएं खुली हैं।

राज्य की वितरण कंपनियों ने भी उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किया है
इस बदलाव की नींव मजबूत अवसंरचना विकास पर टिकी है। संचारण क्षमता में करीब 20 गुना वृद्धि, वितरण नेटवर्क का पांच गुना से अधिक विस्तार, ग्रिड सबस्टेशनों की संख्या 45 से बढ़कर 175 तक पहुंचना और ट्रांसफार्मरों में दस गुना से अधिक वृद्धि ये सभी उपलब्धियां बिहार को एक मजबूत और विश्वसनीय विद्युत नेटवर्क प्रदान करती हैं, जो औद्योगिक विकास को गति देने में सक्षम है। राज्य की वितरण कंपनियों ने भी उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2021 में 1,942 करोड़ रुपए के घाटे से निकलकर वित्त वर्ष 2025 में दो हजार करोड़ रुपए से अधिक के लाभ तक पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि है। एटी एंड सी घाटा घटकर लगभग 15 प्रतिशत रह गया है और दोनों डिस्कॉम्स को ‘ए’ रेटिंग प्राप्त हुई है, जो उनकी बेहतर कार्यक्षमता और वित्तीय मजबूती को दर्शाती है।
डिजिटल बढ़त और भविष्य का ऊर्जा विजन
ऊर्जा सेवाओं के डिजिटलीकरण में बिहार ने अग्रणी भूमिका निभाई है। 87 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिससे पारदर्शिता और राजस्व संग्रहण में सुधार हुआ है। साथ ही ईआरपी सिस्टम, एकीकृत आईटी डैशबोर्ड और केंद्रीकृत कमांड सेंटर जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं ने पूरे सिस्टम को अधिक कुशल और उत्तरदायी बनाया है। बिहार सरकार ने अगले पांच वर्षों में टीबीसीबी मोड में 81 हजार करोड़ रुपए के निवेश से राज्य की ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की योजना बनायीं है। इस योजना के तहत 38,950 करोड़ रुपए पावर जनरेशन की ओर लगाए जायेंगे, 16,194 करोड़ ट्रांसमिशन को मजबूत करने के लिए लगाए जायेंगे और 22,951 करोड़ डिस्ट्रीब्यूशन तो सुदृढ़ बनाने में लगाए जाएंगे। इनके अतिरिक्त मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के मेंटेनेंस और रख-रखाव के लिए 3346 करोड़ रुपए लगाए जाएंगे।

समिट के दौरान बिहार ने अपने भविष्य के ऊर्जा विजन को भी मजबूती से प्रस्तुत किया
समिट के दौरान बिहार ने अपने भविष्य के ऊर्जा विजन को भी मजबूती से प्रस्तुत किया। पीरपैंती की लगभग 30 हजार करोड़ रुपए की परियोजना और कजरा की सौर एवं बैटरी स्टोरेज परियोजना इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। पंप्ड स्टोरेज नीति के तहत कुछ ही महीनों में 13 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिलना राज्य के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 के तहत बिहार ने वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 6.1 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। निवेशकों के लिए ट्रांसमिशन शुल्क में छूट, ऊर्जा बैंकिंग, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और कार्बन क्रेडिट जैसे प्रावधान राज्य को एक आकर्षक निवेश गंतव्य बना रहे हैं। भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 में बिहार की यह प्रभावशाली भागीदारी केवल उपलब्धियों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश है बिहार अब ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ते हुए निवेश, नवाचार और विकास का नया केंद्र बनने की दिशा में मजबूती से कदम रख चुका है।


