Ramgarh: विश्व कविता दिवस के अवसर पर Radha Govind University, रामगढ़ के हिंदी विभाग द्वारा स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में साहित्यिक अभिरुचि को प्रोत्साहित करना, उनकी सृजनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करना तथा हिंदी भाषा और काव्य परंपरा के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात हिंदी विभाग के विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी स्वरचित कविताओं का प्रभावशाली पाठ प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में प्रेम, प्रकृति, नारी सशक्तिकरण, सामाजिक विषमताएँ, देशभक्ति एवं मानवीय संवेदनाओं जैसे विविध विषयों पर रचनाएँ सुनाई गईं, जिन्हें श्रोताओं और निर्णायकों द्वारा खूब सराहा गया। प्रतियोगिता में पुण्य कर्ण को प्रथम, राजकुमार महतो को द्वितीय और नीलम कुमारी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
कविता मानव हृदय की गहराइयों से निकली वह अभिव्यक्ति है- कुलाधिपति
इस अवसर पर Radha Govind University के कुलाधिपति बी. एन. साह ने अपने संदेश में कहा कि कविता मानव हृदय की गहराइयों से निकली वह अभिव्यक्ति है, जो समाज को संवेदनशील और जागरूक बनाती है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों की सृजनशीलता को निखारने में अत्यंत सहायक होते हैं। विश्वविद्यालय की सचिव प्रियंका कुमारी ने अपने संदेश में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि भावनाओं और विचारों का सशक्त माध्यम है। युवाओं को अपने विचारों को सकारात्मक दिशा में अभिव्यक्त करने के लिए ऐसे मंचों का अधिकाधिक उपयोग करना चाहिए। कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि ने कहा कि विश्व कविता दिवस जैसे अवसर हमें साहित्य के महत्व को समझने और उसे जीवन में अपनाने की प्रेरणा देते हैं। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रचनाएँ उनकी रचनात्मक क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। वहीं कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल ने अपने संबोधन में कहा कि कविता समाज का दर्पण होती है और विद्यार्थियों की रचनाएँ उनके चिंतन और दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करती हैं। हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मनमीत कौर ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कविता आत्मा की आवाज होती है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने भीतर की संवेदनाओं को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है। भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा।
प्रतियोगिता के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. सत्येन्द्र कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अंजनी कुमार मिश्र द्वारा किया गया। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के लिए एक सृजनात्मक मंच सिद्ध हुआ, बल्कि विश्वविद्यालय के साहित्यिक वातावरण को भी समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


