झारखंड में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया तेज, 5 नाम राजभवन भेजे गए, हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 13 अप्रैल तय की।
Jharkhand High Court Update रांची: झारखंड में संवैधानिक संस्थाओं में रिक्त पदों पर नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने झारखंड हाईकोर्ट को बताया कि 25 मार्च को चयन समिति की बैठक हो चुकी है और उसमें लिए गए निर्णयों की जानकारी जल्द ही अदालत को दी जाएगी। फिलहाल मुख्यमंत्री के राज्य से बाहर होने के कारण प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
Jharkhand High Court Update:हाईकोर्ट में एक साथ कई याचिकाओं पर सुनवाई
झारखंड हाईकोर्ट में राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर अवमानना याचिका सहित अन्य जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए महाधिवक्ता का पक्ष सुना। सुनवाई के बाद अदालत ने अगली तिथि 13 अप्रैल निर्धारित की है।
Key Highlights
सूचना आयुक्त नियुक्ति मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई
25 मार्च को चयन समिति की बैठक में लिया गया निर्णय
पांच नामों की सूची राजभवन को भेजी गई
अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी
नियुक्ति प्रक्रिया पर राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार
Jharkhand High Court Update:सूचना आयुक्तों के लिए पांच नाम राजभवन भेजे गए
राज्य सरकार ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए पांच नामों की सूची मंजूरी हेतु राजभवन भेज दी है। इस सूची में वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा, धर्मवीर सिन्हा, रांची विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक और पूर्व छात्र नेता तनुज खत्री, कांग्रेस नेता अमूल्य नीरज खलखो तथा भाजपा प्रवक्ता शिवपूजन पाठक शामिल हैं।
कार्मिक विभाग की ओर से भेजे गए इन नामों पर अब राज्यपाल की स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है।
Jharkhand High Court Update:चयन समिति की बैठक में हुआ अंतिम निर्णय
सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के बीच बैठक हुई थी। इसी प्रक्रिया के तहत चयन समिति ने नामों को अंतिम रूप दिया और मंजूरी के लिए राजभवन भेजा गया।
सरकार का कहना है कि संवैधानिक पदों पर जल्द नियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी।
Jharkhand High Court Update:याचिकाकर्ता की ओर से हुई पैरवी
इस मामले में प्रार्थी राजकुमार की ओर से वरीय अधिवक्ता वीपी सिंह और अधिवक्ता अभय कुमार मिश्र ने पैरवी की। अदालत में नियुक्ति प्रक्रिया में देरी को लेकर सवाल उठाए गए थे।
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