बिहार का Makhana बन चुका है ब्रांड, अब विदेशों में भी हो रहा है इसका निर्यात

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Makhana
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Patna: वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार का मखाना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत ब्रांड के रूप में उभरा है। यह वह समय रहा जब राज्य और केंद्र सरकार ने मिलकर बिहार के Makhana को अंतरराष्ट्रीय पटल पर महत्ता दिलाई। सरकारी योजनाओं, खासकर मखाना विकास योजना और हालिया निर्यात पहलों के कारण मखाना किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।

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85% उत्पादन के साथ देश में अग्रणी, खेती का रकबा तीन गुना बढ़ा

इस दौरान पहली बार जीआई-टैग प्राप्त मिथिला मखाना को समुद्री मार्ग से पूर्णिया जिले से दुबई (संयुक्त अरब अमीरात) भेजा गया। 2 मीट्रिक टन की यह ऐतिहासिक खेप 21 जनवरी 2026 को रवाना की गई थी। यह निर्यात वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (भारत सरकार), बिहार सरकार और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), पटना के सहयोग से संपन्न हुआ था। समुद्री मार्ग से हुए इस सफल निर्यात ने साबित किया कि बिहार अब अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स में सक्षम हो चुका है। इससे किसानों, किसान उत्पादक संगठनों और उद्यमियों को नए बाजार मिलने की शुरुआत हो चुकी है।

सितंबर में हुआ था राष्ट्रीय Makhana बोर्ड का गठन

केंद्र सरकार ने सितंबर 2025 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन किया था, जिससे राज्य के लगभग 5 लाख Makhana किसानों की किस्मत बदली है। बिहार देश का करीब 85 प्रतिशत मखाना उत्पादन करता है। बोर्ड के गठन से प्रोसेसिंग, व्यापार, मूल्य संवर्धन और निर्यात को मजबूती मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 सितंबर 2025 को पूर्णिया में बोर्ड का औपचारिक शुभारंभ किया था।

इसके साथ ही केंद्र सरकार ने 2025-26 से 2030-31 तक केंद्रीय Makhana विकास योजना को मंजूरी दी है, जिसकी कुल लागत 476.03 करोड़ रुपये है। इस योजना के तहत मखाना के क्षेत्र में अनुसंधान, गुणवत्ता युक्त बीज उत्पादन, किसानों की क्षमता विकास, कटाई-प्रसंस्करण तकनीक, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा।

तीन गुना बढ़ा मखाना खेती का रकबा

मखाना विकास योजना और मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के तहत Makhana उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है। हाल के वर्षों में सरकारी प्रोत्साहन के बाद इसकी खेती का रकबा तीन गुना बढ़ चुका है। वर्ष 2012 में यह करीब 13,000 हेक्टेयर था, जो अब करीब 35,000 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। मुख्य रूप से राज्य के दरभंगा, मधुबनी, कटिहार, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया जिले में मखाना उत्पादन होता है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 बिहार के मखाना के लिए ऐतिहासिक रहा है। जीआई-टैग प्राप्त मिथिला मखाना का दुबई तक समुद्री मार्ग से निर्यात राज्य की बड़ी उपलब्धि है, जिससे किसानों को वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर मिला। राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन और मखाना विकास योजना से उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात को नई गति मिली है, जिससे लाखों किसानों की आय और जीवन स्तर में सुधार हो रहा है। बिहार सरकार मखाना को ‘ब्रांड बिहार’ के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि राज्य विश्व स्तर पर मखाना उत्पादन और निर्यात का प्रमुख केंद्र बन सके।

 

 

 

 

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