झारखंड में JPSC PT और सिविल कोर्ट क्लर्क इंटरव्यू 19 अप्रैल को एक साथ होने से अभ्यर्थियों में असमंजस, तिथि बदलने की मांग तेज।
Jharkhand Jobs Crisis रांची: झारखंड में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। 19 अप्रैल को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और सिविल कोर्ट में असिस्टेंट क्लर्क भर्ती के इंटरव्यू की तिथि एक ही दिन निर्धारित कर दी गई है। ऐसे में सैकड़ों अभ्यर्थियों के सामने यह दुविधा उत्पन्न हो गई है कि वे किस प्रक्रिया में शामिल हों और किसे छोड़ें।
Jharkhand Jobs Crisis:एक ही दिन दो अहम परीक्षाएं, अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता
JPSC द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार प्रारंभिक परीक्षा 19 अप्रैल को दो पालियों में आयोजित होगी। पहली पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होगी। वहीं सिविल कोर्ट में असिस्टेंट क्लर्क पद के लिए इंटरव्यू भी उसी दिन पूरे दिन आयोजित किया जाएगा। इस कारण दोनों प्रक्रियाओं में एक साथ शामिल होना संभव नहीं है, जिससे अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बन गई है।
Key Highlights
19 अप्रैल को JPSC PT और सिविल कोर्ट इंटरव्यू एक साथ
अभ्यर्थियों के सामने एक प्रक्रिया छोड़ने की मजबूरी
JPSC परीक्षा दो पालियों में होगी आयोजित
हाईकोर्ट भर्ती का शेड्यूल पहले से तय था
तिथि बदलने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी
Jharkhand Jobs Crisis: पहले से तय थी कोर्ट भर्ती प्रक्रिया
झारखंड हाईकोर्ट की भर्ती प्रक्रिया पहले से ही निर्धारित थी। इसके तहत 11 अप्रैल को कंप्यूटर स्किल टेस्ट, 12 अप्रैल को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और 13 से 19 अप्रैल तक इंटरव्यू की तिथि तय की गई थी। इसी बीच JPSC ने भी 19 अप्रैल को पीटी परीक्षा की घोषणा कर दी, जिससे तिथियों का टकराव सामने आया।
Jharkhand Jobs Crisis: तिथि बदलने की मांग तेज
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि इनमें से किसी एक प्रक्रिया की तिथि में बदलाव नहीं किया गया, तो उन्हें मजबूरन एक अवसर छोड़ना पड़ेगा। इससे उनके करियर पर सीधा असर पड़ सकता है। अभ्यर्थियों ने संबंधित विभागों से तिथि में संशोधन करने की मांग तेज कर दी है, ताकि सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके।
Jharkhand Jobs Crisis: प्रशासनिक समन्वय पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने भर्ती परीक्षाओं के आयोजन में समन्वय की कमी को उजागर किया है। अभ्यर्थियों का मानना है कि राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली बड़ी परीक्षाओं के बीच तालमेल जरूरी है, ताकि इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो।
Highlights







