Jharkhand: Jharkhand में प्रतियोगिता परीक्षा हो और परीक्षा विवादों में न घिरे, असंभव! झारखंड की शिक्षा व्यवस्था को किसी की बुरी नजर लग गई है। एक तो यहां से समय से फॉर्म नहीं निकलते हैं और अगर समय से फॉर्म निकल जाए और एग्जाम भी हो जाए तो उसे भी विवादों में घिर ही जाना है। अभी जेएसएससी सीजीएल का विवाद ठंडा नहीं हुआ था और अब एक बार फिर जेएसएससी की परीक्षा उत्पाद सिपाही यानी एक्साइज कॉन्सटेबल की परीक्षा में पेपर लीक और सॉल्वर गैंग की सक्रियता सामने आगई ।
150 से अधिक युवकों की हुई गिरफ्तारी
उत्पाद सिपाही 2023 की परीक्षा आज 12 अप्रैल 2026 को लंबे इंतजार के बाद हुई भी तो परीक्षा विवादों में घिर गई। परीक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह से पहले से ही मुस्तैद नजर आ रही थी और परीक्षा शुरु होने से पहले ही आशंकाओं का दौर शुरु हुआ । परीक्षा शुरु होने से पहले पेपर लीक की अफवाहें फैली और पुलिस-प्रशासन के जांच के बाद तमाड़ थाना में 150 से अधिक युवकों की गिरफ्तारी की गई, तमाड़ थाना में पुलिस ने युवकों से लंबी पूछताछ की।
15 लाख प्रति अभ्यर्थी, ठगी की थी योजना
हालांकि पेपर लीक की पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन अब झारखंड में उससे भी बड़ा चिंता का विषय है सॉल्वर गैंग..जी हां, वहीं सॉल्वर गैंग जो सीजीएल एग्जाम के समय सक्रिय थी यानी प्रश्नों के उत्तर रटवाने वाले गैंग। उत्पाद सिपाही की परीक्षा के जांच में पाया गया कि कुछ सॉल्वर गैंग के लोगों ने उत्पाद सिपाही के अभ्यर्थियों को ठगी का शिकार बनाया गया है। और एक अभ्यर्थी से 15-15 लाख रुपये की ठगी करने की योजना थी, जैसा कि पहले JSSC CGL में किया गया। यानी झारखंड में सरकारी नौकरियों की खरीद-फरोख्त का एक मकड़जाल बुना जा रहा है।
रांगामाटी स्थित स्कूल में पुलिस की छापा
आज राजधानी रांची के तमाड़ थाना क्षेत्र से पुलिस ने सॉल्वर गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार किया है। बता दें तमाड़ स्थित रांगामाटी स्थित स्कूल में उत्पाद सिपाही परीक्षा के पेपर लीक किये जाने की तैयारी किये जाने की सूचना पर रांची पुलिस घटनास्थल पर पहुंची थी, रांगामाटी स्कूल में काफी संख्या में परीक्षार्थी मौजूद थे।
रांगामाटी मेन रोड से बायें जाने वाले रास्ते मे डेढ़-दो किलोमीटर दूर पर स्कूल स्थित है, रांची पुलिस की टीम जब वहां पहुंची तो पुलिस को आते देख दो परीक्षार्थी भाग निकले।
इसके बाद रांची पुलिस ने कुछ परीक्षार्थी को पकड़ा. जानकारी के अनुसार चार लोगों को तमाड़ थाने की पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
मामले की जानकारी एसएसपी ने दी
इस मामले की जानकारी देते हुए एसएसपी ने बताया कि तमाड़ के रंगमाटी इलाके में स्थित एक अर्द्धनिर्मित भवन में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर पुलिस ने यह सफलता हासिल किया है। मौके से मोबाइल फोन, दस्तावेज और अन्य सामग्री भी बरामद की गई है। कुख्यात इंटरस्टेट परीक्षा माफिया के साथ गिरोह के अन्य चार गुर्गा को गिरफ्तार किया गया है, मौके पर से 08 वाहनों को भी जप्त किया गया है। गिरफ्तार पेपर लीक गैंग का सरगना अतुल वत्स बिहार के जहानाबाद जिले के घोषी थाना क्षेत्र के बंधुगंज का रहने वाला है।
पेपर लीक गैंग के उपस्थित सदस्यों के द्वारा इन अभ्यर्थियों को उक्त प्रश्नोत्तर सेट को रटाये जा रहा था। जाँच में ये तथ्य सामने आये कि उक्त गैंग के अलग-अलग ऐजेन्टों के द्वारा इन अभ्यर्थियों को 10-15 लाख प्रति अभ्यर्थी की दर से परीक्षा पास कराने के लिए प्रश्नों एवं इनके उत्तर उपलब्ध कराने के साथ याद कराने के लिए उक्त स्थल पर लाया गया था। उक्त अभ्यर्थियों द्वारा पुलिस से बचने के लिए अपना मोबाईल फोन, एडमिट कार्ड इत्यादि गैंग के हवाले कर दिया गया था और कुछ अभ्यर्थियों के द्वारा बैंक चेक भी गैंग के सदस्यों के नाम दे दिया गया था।
इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन?
झारखंड के परीक्षाओं में ऐसी स्थिति देखते हुए राज्य के भविष्य के बारे में आप चिंता सकते हैं। इस हालात के लिए आखिर जिम्मेदार कौन हैं- सरकार या अभ्यर्थी… समयसे परीक्षा नहीं होने के कारण राज्य के अभ्यर्थियों में काफी असंतोष और उम्र निकल जाने का डर समाया रहता है, जब भी भर्ती निकलती है तो अभ्यर्थी किसी भी कीमत पर अपना मौका नहीं गंवाना चाहते हैं और उन्हें किसी भी कीमत पर नौकरी चाहिए होती है। सरकार समय समय से भर्ती निकाले और समय पर अभ्यर्थियों को नौकरी दे तो शायद ये परिस्थिति न बने।
सरकार और अभ्यर्थियों के प्रतिस्पर्धा में इस तरह के सॉल्वर गैंग जैसे बिचौलियों को मौका निल जाता है और वे अभ्यर्थियोम को नौकरी के लालच के नाम पर लाखों कमाकर ठगी को अंजाम देते हैं लेकिन क्याहमारी सरकार इतनी कमजोर है कि अभ्यर्थियों से कई नौकरी बेचे जाने का दावा कर रहा है तो उसे इतनी आसानी से सच कैसे मान लिया जा रहा है। क्या सरकार की नौकरी तक किसी भी बिचौलियों का घुस पाना इतना आसान है।
लेकिन ऐसे समय में सवाल यह भी उठता है कि उन बच्चों का क्या जो सिर्फ एक सरकारी नौकरी के सपने को लिए अपनी गांव-घर छोड़कर शहर के छोटे से कमरें में दिन रात पढ़ाई कर रहे हैं जिन्हें लगता है अगर वो पूरी इमानदारी से पढ़ेंगे तो नौकरी उन्हें जरुर मिल जाएगी। लेकिन जब नकरियां बेची जाएगी तो उनका हक उन्हें कैसे मिल पाएगा।
कब सुधरेगी झारखंड की शिक्षा व्यवस्था?
Jharkhand में इस तरह परीक्षाओं में सॉल्वर गैंग का एक्टिव होना, पेपर लीक की खबरें बार-बार आना। झारखंड सरकार के इतने सख्त कानून के बाद भी किसी के मन में भय नहीं होना, आने वाले समय के लिए भारी चिंता की स्थिति है। इस गंभीर मुद्दे पर सरकार को समाज को खुद अभ्यर्थियों को भी सोचना होगा, काम करना होगा।क्या इस तरह की शिक्षा व्यवस्था से राज्य आगे बढ़ सकता है।
क्या पेपर लीक, घोटाले, भ्रष्टाचार की राज्य ही बनकर रह जाएगा झारखंड? क्या कभी झारखंड में साफ-सुथरी परीक्षा संभव है, क्या झारखंड की शिक्षा व्यवस्था कभी सुधर पाएगी या यहां की शिक्षा भी राजनीति की भेंट चढ़ जाएगी?
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