बंगाल की राजनीति में बड़ा सत्ता संघर्ष। कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी रहे शुभेंदु अधिकारी अब दीदी की सत्ता के सबसे बड़े चुनौतीकर्ता बनकर उभरे।
West Bengal Political Satire रांची: बंगाल की राजनीति में आज से एक नया अध्याय शुरू हो गया। कहते हैं कि सत्ता बदलने से ज्यादा खतरनाक होता है सत्ता के आसपास खड़े चेहरों का बदल जाना। और बंगाल में अब वही हो रहा है।
कभी Mamata Banerjee की सबसे भरोसेमंद परछाई रहे Suvendu Adhikari आज बंगाल की राजनीति के नए शक्ति केंद्र बनकर उभरे हैं। जिस नेता को कभी दीदी ने संगठन की रीढ़ बनाया, बड़े मंत्रालय दिए, प्रशासन की चाबी सौंपी, वही आज उनकी सत्ता की सबसे बड़ी बेचैनी बन चुका है।
व्यंग यही है कि दीदी ने विपक्ष से कम और अपने ही घर से ज्यादा लड़ाई लड़ी। भतीजे Abhishek Banerjee को राजनीतिक वारिस बनाने की जल्दबाजी में उन्होंने उस सेनापति को किनारे कर दिया, जो बंगाल के गांव-गांव में टीएमसी की ईंट जोड़ता था। पोस्टरों से तस्वीर हटाई गई, मंचों से दूरी बनाई गई, लेकिन शायद दीदी भूल गईं कि राजनीति में अपमानित महत्वाकांक्षा सबसे खतरनाक हथियार बन जाती है।
West Bengal Political Satire
फिर दिल्ली ने वही दांव चला, जो शतरंज में सबसे निर्णायक माना जाता है। Amit Shah ने बंगाल की लड़ाई बंगाल के ही आदमी के हाथ में दे दी। 19 दिसंबर 2020 को शुभेंदु अधिकारी बीजेपी में शामिल हुए और उसी दिन यह तय हो गया कि अब लड़ाई सिर्फ बीजेपी बनाम टीएमसी नहीं रहेगी, बल्कि “दीदी बनाम उनकी ही बनाई परछाई” होगी।
राजनीति का सबसे बड़ा तंज देखिए —
जिस नेता को कभी ममता बनर्जी अपना उत्तराधिकारी समझती थीं, वही आज उनके राजनीतिक भविष्य का सबसे बड़ा सवाल बन चुका है।
West Bengal Political Satire
बंगाल में अब लोग कहने लगे हैं —
“दीदी ने भतीजे को बचाने के चक्कर में अपना सबसे मजबूत किला खुद ढहा दिया।”
और अब हालात ऐसे हैं कि बंगाल की राजनीति में हर बड़ा फैसला, हर बड़ा हमला और हर बड़ी चुनौती के पीछे एक ही नाम गूंजता है — शुभेंदु अधिकारी।
कभी दीदी का सिपहसालार…
अब दीदी की सत्ता का सबसे बड़ा सिरदर्द।
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