पटना : राज्य के किसानों, उपभोक्ताओं एवं पर्यावरण की सुरक्षा के मद्देनज़र नकली, संदिग्ध एवं अपंजीकृत कीटनाशकों की बिक्री एवं प्रचार-प्रसार पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। ये बातें कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहीं। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के संज्ञान में लगातार यह तथ्य आ रहा है कि विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया, यूट्यूब चैनलों एवं अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए अपंजीकृत कीटनाशकों, फफूंदनाशकों, खरपतवारनाशकों एवं चूहानाशकों का अवैध रूप से प्रचार एवं विक्रय किया जा रहा है, जो अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक विषय है।
जो कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत विधिवत पंजीकृत हैं – कृषि विभाग
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि देश एवं राज्य में केवल उन्हीं कीटनाशियों के निर्माण, भंडारण, वितरण एवं बिक्री की अनुमति है, जो कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत विधिवत पंजीकृत हैं। अपंजीकृत अथवा नकली कीटनाशकों का उपयोग किसानों की फसल, भूमि की उर्वरता, मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके अतिरिक्त किसानों को आर्थिक क्षति का भी सामना करना पड़ता है।
केवल पंजीकृत एवं वैध कीटनाशकों के प्रचार एवं बिक्री की है अनुमति
कृषि निदेशक ने बताया कि कृषि निदेशालय के स्तर से सभी ई-कॉमर्स कंपनियों, डिजिटल विपणन प्लेटफॉर्मों, सोशल मीडिया संचालकों एवं यूट्यूब चैनलों को निर्देशित किया गया है कि वे केवल पंजीकृत एवं वैध कीटनाशकों के प्रचार एवं बिक्री की अनुमति सुनिश्चित करें। किसी भी परिस्थिति में अपंजीकृत या संदिग्ध उत्पादों के प्रचार-प्रसार अथवा बिक्री को बढ़ावा न दिया जाए।
डिजिटल माध्यमों के जरिए अपंजीकृत कीटनाशकों की आपूर्ति अथवा बिक्री किए जाने की जानकारी प्राप्त होती है
यदि किसी विपणन कंपनी, वितरक अथवा विक्रेता द्वारा डिजिटल माध्यमों के जरिए अपंजीकृत कीटनाशकों की आपूर्ति अथवा बिक्री किए जाने की जानकारी प्राप्त होती है, तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित जिले के सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण को उपलब्ध कराई जाए। प्राप्त शिकायतों एवं सूचनाओं के आधार पर संबंधित विक्रेताओं एवं कंपनियों के विरुद्ध कीटनाशक अधिनियम, 1968 एवं प्रासंगिक नियमों के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
संदिग्ध कीटनाशकों की सूचना दें, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
कृषि विभाग ने किसानों से भी अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही पंजीकृत कीटनाशक खरीदें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना विभाग को तुरंत दें। विभाग किसानों के हितों की रक्षा एवं सुरक्षित कृषि व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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