Bihar NEET Solver Gang: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा, NEET-UG को लेकर बिहार में एक बार फिर धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद, लखीसराय में एक “सॉल्वर गैंग” (परीक्षा देने वाले बहुरूपिये) का पर्दाफाश हुआ और मुजफ्फरपुर में नकली प्रश्न पत्र बेचकर लोगों को ठगने वाले एक अलग गिरोह का भंडाफोड़ किया गया। परीक्षा के दौरान बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, फेस ऑथेंटिकेशन, CCTV निगरानी और पुलिस की तैनाती जैसे उपायों के बावजूद कुछ जगहों पर सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिशें की गईं। मामले की जांच अब आगे बढ़ रही है।
लखीसराय में दूसरे उम्मीदवारों की जगह परीक्षा देते हुए बहुरूपिये पकड़े गए
लखीसराय में री-NEET परीक्षा के दौरान, प्रशासन ने तीन अलग-अलग केंद्रों से नौ लोगों को पकड़ा, जो कथित तौर पर असली उम्मीदवारों की जगह परीक्षा देने आए थे। वेरिफिकेशन के दौरान जब दस्तावेज, तस्वीरें और फिंगरप्रिंट मेल नहीं खाए तो अधिकारियों को शक हुआ, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की गई। जिले के चार परीक्षा केंद्रों में केंद्रीय विद्यालय, हसनपुर हाई स्कूल, KRK हाई स्कूल और DIET लखीसराय शामिल थे। जांच में केंद्रीय विद्यालय में सात, हसनपुर में एक और KRK स्कूल में एक बहुरूपिया पाया गया। पुलिस के अनुसार, इस मामले में अब तक पांच मेडिकल छात्रों सहित 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
₹40 लाख तक के सौदों की जांच
जांच से पता चलता है कि उम्मीदवारों और बहुरूपियों के बीच लाखों रुपये का लेन-देन हुआ। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि कुछ मामलों में, उम्मीदवारों के परीक्षा पास करने को सुनिश्चित करने के लिए ₹40 लाख तक के सौदे किए गए थे। पुलिस अब इस नेटवर्क में शामिल सभी लोगों की पहचान करने और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह गिरोह अतीत में भी इसी तरह की परीक्षाओं में सक्रिय रहा है। जांच एजेंसियां मोबाइल फोन, दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और तकनीकी रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं।
बायोमेट्रिक एजेंसी के कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस मामले में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रशासन ने परीक्षा के दौरान बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने के लिए जिम्मेदार निजी एजेंसी के कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लिया है। इस बात की जांच की जा रही है कि बहुरूपिया उम्मीदवार उचित प्रक्रियाओं से गुजरे बिना परीक्षा केंद्र में कैसे दाखिल हुए। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह महज लापरवाही का मामला था या इसमें मिलीभगत शामिल थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, ज़िला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों ने जांच के लिए परीक्षा केंद्रों का खुद दौरा किया।
मुजफ्फरपुर में नकली प्रश्न-पत्र बेचने का फर्जीवाड़ा
लखीसराय के अलावा, मुज़फ़्फ़रपुर में भी NEET परीक्षा के नाम पर फ़र्ज़ीवाड़ा करने वाले एक गिरोह का पर्दाफ़ाश हुआ है। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह छात्रों को असली प्रश्न-पत्र देने का वादा करके उन्हें ठगता था और उनसे पैसे ऐंठता था। आरोपी सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए छात्रों से संपर्क करते थे। जांच में पता चला कि गिरोह टेलीग्राम पर ग्रुप चलाकर छात्रों को गुमराह करता था। छात्रों से पैसे लेने के लिए ऑनलाइन पेमेंट के तरीकों और QR कोड का इस्तेमाल किया जाता था।
पुलिस को अंतर-राज्यीय नेटवर्क का शक
पुलिस को शक है कि इस मामले का दायरा बिहार से बाहर भी फैला हो सकता है। जांच एजेंसियां किसी अंतर-राज्यीय “सॉल्वर गैंग” के शामिल होने की संभावना की भी जांच कर रही हैं। एक गुप्त सूचना के आधार पर, मुज़फ़्फ़रपुर पुलिस ने सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के एक किराए के घर में छापेमारी की। वहां मुख्य आरोपी को गिरफ़्तार किया गया और मोबाइल फ़ोन व लैपटॉप समेत कई डिजिटल सबूत ज़ब्त किए गए। पुलिस अभी पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
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