Patliputra Greenfield Satellite Township: बिहार में भविष्य के शहरी विकास को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकास योजना 2047 को लेकर हितधारकों के साथ महत्वपूर्ण परामर्श बैठक आयोजित की गई। ऊर्जा ऑडिटोरियम, पटना में आयोजित बैठक की अध्यक्षता नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने की। बैठक में प्रस्तावित टाउनशिप के विकास मॉडल, भूमि व्यवस्था, परिवहन, आवास, रोजगार, सार्वजनिक सुविधाओं और पर्यावरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। सरकार की ओर से योजना को अधिक सहभागी और नागरिक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया।
किसानों और भू-स्वामियों से संवाद पर विशेष जोर
मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप केवल नया शहर बसाने की योजना नहीं है, बल्कि बिहार के भविष्य के शहरी विकास को बेहतर तरीके से नियोजित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस योजना की सफलता का आधार व्यापक जनभागीदारी और निरंतर संवाद है। उन्होंने बताया कि विभाग हितधारकों के साथ संवाद का विस्तृत कार्यक्रम तैयार कर रहा है। इसके तहत किसानों और भू-स्वामियों के बीच जाकर योजना के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी तथा उनके सुझावों और विचारों को गंभीरता से सुना जाएगा। खास तौर पर उन भू-स्वामियों से प्रत्यक्ष संवाद किया जाएगा, जिनकी जमीन प्रस्तावित योजना के दायरे में आ रही है। उनकी सहभागिता और सहमति के साथ योजना को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
9 प्रखंडों के 273 गांव होंगे योजना के दायरे में
प्रस्तावित पाटलिपुत्र टाउनशिप का क्षेत्र काफी व्यापक है। योजना के अनुसार यह 9 प्रखंडों के 273 गांवों में विस्तृत होगा। इसमें पुनपुन, नौबतपुर, मसौढ़ी, फतुहा, संपतचक, पटना ग्रामीण, धनरुआ, दनियावां और फुलवारी प्रखंड के क्षेत्र शामिल हैं। योजना के अंतर्गत नौबतपुर नगर पंचायत का आंशिक तथा पुनपुन नगर पंचायत का पूर्ण क्षेत्र भी शामिल है। प्रस्तावित टाउनशिप का कुल क्षेत्रफल लगभग 81,730 एकड़ बताया गया है। इसके अलावा लगभग 3,008 एकड़ का कोर एरिया प्रस्तावित है, जिसमें पुनपुन प्रखंड के 19 गांव शामिल होंगे।
आवास, रोजगार और परिवहन सुविधाओं पर फोकस
ग्रीनफील्ड टाउनशिप के माध्यम से पटना के मौजूदा शहरी क्षेत्र पर बढ़ते दबाव को संतुलित करने और नए आवास, रोजगार, निवेश तथा कारोबार के अवसर विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित विकास मॉडल में आवास के साथ सड़क, सार्वजनिक परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, पार्क, जलापूर्ति, सीवरेज और जल निकासी जैसी आवश्यक सुविधाओं को एक साथ विकसित करने की अवधारणा रखी गई है। टाउनशिप में TOD यानी Transit-Oriented Development को बढ़ावा देने के साथ पैदल चलने और साइकिल के लिए सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। मिश्रित और संतुलित भूमि उपयोग के माध्यम से वाहन निर्भरता कम करने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।
भूमि व्यवस्था में भू-स्वामियों की भागीदारी पर जोर
टाउनशिप के विकास में विकास योजना, भूमि उपयोग योजना और टाउन प्लानिंग स्कीम को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। भूमि पूलिंग, भूमि पुनर्संयोजन अथवा अन्य लागू भूमि व्यवस्था के माध्यम से भू-स्वामियों को विकास प्रक्रिया में सहभागी बनाने की बात कही गई है। छोटे भू-स्वामियों, किसानों और स्थानीय समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए विकास प्रक्रिया को सहभागी और न्यायसंगत बनाने पर जोर दिया गया है। जहां आवश्यक होगा, वहां सहमति आधारित व्यवस्था या लागू कानून के अनुसार भूमि अर्जन की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
पर्यावरण और निवेश को भी मिलेगा महत्व
प्रस्तावित टाउनशिप में सेक्टर पार्क, सामुदायिक पार्क, हरित गलियारे, खेल क्षेत्र और जल निकायों के संरक्षण जैसे प्रावधानों के जरिए पर्यावरण और जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। बैठक में CREDAI बिहार, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स, स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी के सदस्य बैंकों, ITPI, IIA और IEI के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न हितधारकों ने हिस्सा लिया। विभाग के अनुसार प्राप्त सुझावों और आपत्तियों को योजना को अधिक व्यावहारिक, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाने में उपयोग किया जाएगा। प्रस्तावित टाउनशिप से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा मिलने तथा रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को बिहार के भविष्य के शहरी विकास के एक नियोजित, पर्यावरण-अनुकूल और नागरिक-केंद्रित मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।

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