JEEViKA 20 Years Bihar: बिहार की ग्रामीण महिलाओं ने कैसे बदली अपनी जिंदगी, जानिए पूरी कहानी

JEEViKA 20 Years Bihar, पटना: बिहार की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें सामाजिक बदलाव की मुख्यधारा से जोड़ने वाली जीविका पहल 2 अक्टूबर 2026 को अपने 20 वर्ष पूरे कर रही है। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2006 को शुरू हुई बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी (BRLPS) की इस पहल ने दो दशकों में ग्रामीण परिवारों के जीवन में कई बदलाव लाने का प्रयास किया है। शुरुआत में विश्व बैंक की सहायता से कुछ जिलों में पायलट परियोजना के रूप में शुरू हुई जीविका आज राज्यव्यापी कार्यक्रम बन चुकी है। इस पहल के जरिए ग्रामीण महिलाओं को बचत, बैंक ऋण, स्वरोजगार और सामूहिक नेतृत्व से जोड़ने पर जोर दिया गया है। इससे महिलाएं परिवार की आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ गांव के सामाजिक और विकास संबंधी मुद्दों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

11.85 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़े 1.81 करोड़ परिवार

जीविका के तहत बिहार में करीब 11.85 लाख स्वयं सहायता समूह (SHG) संचालित होने की जानकारी दी गई है। इन समूहों से लगभग 1.81 करोड़ परिवार जुड़े हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के ग्रामीण परिवारों की भी इसमें व्यापक भागीदारी है। समूहों के माध्यम से महिलाएं नियमित बचत करती हैं और जरूरत पड़ने पर सामूहिक वित्तीय संसाधनों का उपयोग करती हैं। इससे उन्हें छोटे कारोबार, कृषि और घरेलू जरूरतों के लिए वित्तीय सहायता हासिल करने का रास्ता मिलता है। समूहों में महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका भी बढ़ी है। इससे ग्रामीण स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को बढ़ावा मिला है।

हजारों करोड़ का बैंक ऋण, बचत से मजबूत हुई आर्थिक स्थिति

जीविका समूहों की आर्थिक गतिविधियों का दायरा लगातार बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, समूहों की साप्ताहिक बचत करीब 2,693 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। वहीं, बैंकों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को 69,000 करोड़ रुपये से अधिक का संस्थागत ऋण उपलब्ध कराया गया है। ऋण की वापसी दर करीब 99 प्रतिशत बताई गई है। समूह आधारित वित्तीय व्यवस्था ने महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने और साहूकारों पर निर्भरता कम करने में मदद की है। नियमित बचत और सामूहिक जिम्मेदारी के कारण महिलाएं अपनी आर्थिक जरूरतों की बेहतर योजना बना पा रही हैं। हालांकि, इन उपलब्धियों को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए बाजार तक पहुंच, कारोबार का विस्तार और वित्तीय प्रबंधन जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।

खेती से कारोबार तक, नए कामों से जुड़ रहीं जीविका दीदियां

जीविका ने महिलाओं को कृषि और उद्यमिता से जोड़ने पर भी काम किया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 42 लाख महिला किसान आधुनिक खेती से जुड़ी हैं। इसके अलावा 61 महिला किसान उत्पादक कंपनियां (FPC) भी काम कर रही हैं। ‘लखपति दीदी’ अभियान के तहत महिलाओं को ऐसी आजीविका गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिनसे उनकी सालाना आमदनी एक लाख रुपये या उससे अधिक हो सके। महिलाएं पारंपरिक कामों से आगे बढ़कर निर्माण क्षेत्र में ‘रानी मिस्त्री’ और प्लंबर जैसे काम भी कर रही हैं। इसके साथ ही आंगनवाड़ी पोशाक निर्माण जैसे कार्यों के जरिए भी उन्हें आय के अवसर मिल रहे हैं। इन पहलों से ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के विकल्प बढ़ाने और परिवार की आय में उनकी हिस्सेदारी मजबूत करने का प्रयास किया गया है।

शिक्षा और सामाजिक भागीदारी में भी बढ़ी भूमिका

आर्थिक गतिविधियों के साथ जीविका से जुड़ी महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक भागीदारी पर भी ध्यान दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बिहार बोर्ड ऑफ ओपन स्कूलिंग के माध्यम से हाल में एक हजार से अधिक महिलाओं ने दसवीं की परीक्षा पास की। ग्राम सभाओं और स्थानीय गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से उन्हें अपनी समस्याएं रखने और सामुदायिक फैसलों में हिस्सा लेने का अवसर मिला है। घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों पर जागरूकता और आवाज उठाने की क्षमता को मजबूत करना भी महिला सशक्तीकरण के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। आर्थिक स्वतंत्रता के साथ शिक्षा और सामाजिक जागरूकता महिलाओं को अपने जीवन से जुड़े फैसलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर देती है।

JEEViKA 20 Years Bihar

दो दशक बाद भी बाजार और आय बढ़ाने की चुनौती

जीविका के 20 साल पूरे होने के मौके पर इसकी उपलब्धियों के साथ आगे की चुनौतियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना, महिलाओं के कारोबार को टिकाऊ बनाना और नियमित आय के अवसर बढ़ाना अहम मुद्दे हैं। इसके बावजूद, जीविका ने ग्रामीण महिलाओं को बचत, ऋण, कृषि, उद्यमिता और नेतृत्व से जोड़ने के लिए एक बड़ा संस्थागत नेटवर्क तैयार किया है। दो दशकों की इस यात्रा में महिलाएं केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं रहीं, बल्कि अपने परिवार और समुदाय में बदलाव लाने वाली सक्रिय भागीदार के रूप में उभरी हैं। 2 अक्टूबर को जीविका के 20 वर्ष पूरे होने का अवसर बिहार की ग्रामीण महिलाओं के इसी सफर और उनके आर्थिक-सामाजिक योगदान को रेखांकित करता है।

JEEViKA 20 Years Bihar 1

Shravan Kumar Nalanda News: स्नातक चुनाव से पहले बिहारशरीफ में NDA...

Shravan Kumar Nalanda News, बिहारशरीफ: स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर गुरुवार, 1 अक्टूबर को नालंदा विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)...

Bihar Road Projects: बिहार में एक्सप्रेस-वे और हाईवे निर्माण में आएगी...

Bihar Road Projects, पटना: बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए राज्य सरकार और केंद्रीय सड़क...

Bihar Flood Alert: गंगा का जलस्तर बढ़ने पर अलर्ट CM सम्राट...

Bihar Flood Alert, पटना: बिहार में गंगा, गंडक और सोन नदियों का जलस्तर बढ़ने के बीच राज्य सरकार ने निगरानी तेज कर दी है।...